रामनगर – हिंदी साहित्य भारती और सरोकार साहित्य संस्था के तत्वावधान में मुंशी प्रेमचंद जयंती पर उनका भावपूर्ण स्मरण करते हुए साहित्य को समाज के लिए रोशनी दिखाने वाली मशाल बताया। इस दौरान वक्ताओं ने प्रेमचंद के साहित्य पर रोशनी डालते हुए उन्हें एक कालजयी रचनाकार बताया और उनके उपन्यास, कहानी और अन्य विधाओं पर चर्चा की।
डॉ0 अनुपम शुक्ल के संचालन और गणेश रावत की अध्यक्षता में सम्पन्न गोष्ठी में डॉ0 सत्य प्रकाश मिश्र ने प्रेमचंद को सामान्य साहित्यकारों से अलग कथाकार बताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारत को स्वतंत्र कराने में और इसमें गरीब ग्रामीण भारत को दर्शाने में विशेष भूमिका रही है। मितेश्वरानन्द ने आज के कथाकारों से प्रश्न किया कि समकालीन कहानियों में हामिद, झुरी,होरी, हल्कू जैसे पात्र और किसान मजदूर गायब क्यो हो गए है। शिवकांत शुक्ला जी ने वर्षा रानी के माध्यम से ग्रामीण जीवन को जीवंत कर दिया। महेश्वर बाजपेयी ने अपने गीत के माध्यम से समां बांध दिया। सगीर अशरफ ने अपनी गजलों के माध्यम से सच्चे सौंदर्य का साक्षत्कार कराया। युवा कवि देवेश उपाध्याय ने अपनी चिनाब शीर्षक कविता में कश्मीर के दर्द को उकेर दिया। इस दौरान डॉ0अजय पांडेय, वैष्णवी, विनायक आदि भी शामिल रहे।




