ऊर्जा संकट पर हाई अलर्ट: नरेंद्र मोदी की राज्यों के साथ बड़ी बैठक

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पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संभावित युद्ध के असर अब भारत तक महसूस किए जा रहे हैं, खासकर ऊर्जा क्षेत्र में। कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से देश में ऊर्जा संकट की आशंका गहराने लगी है। इसी स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकारें सक्रिय हो गई हैं और आपसी समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

इन्हीं तैयारियों की समीक्षा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार, 27 मार्च को उत्तराखंड समेत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। हालांकि, जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा हो चुकी है, वहां के मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं होंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य “टीम इंडिया” की भावना के तहत ऊर्जा संकट से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना है।

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इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान पश्चिम एशिया के हालात पर गंभीर चिंता जताई थी। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होकर इस चुनौती का सामना करने की अपील की थी। उन्होंने विशेष रूप से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसके वैश्विक दुष्परिणाम होंगे और भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा। उन्होंने इसे भारत के लिए “परीक्षा की घड़ी” बताते हुए राज्यों के सहयोग को बेहद अहम बताया।

केंद्र सरकार की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब ईरान से जुड़े घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। हालांकि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले भारतीय जहाजों को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है, फिर भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अनिश्चितता बनी हुई है। इसका असर भारत के कुछ हिस्सों में ऊर्जा आपूर्ति पर दिखाई देने लगा है, जहां संकट जैसे हालात की खबरें सामने आ रही हैं।

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इसके बावजूद सरकार ने इन आशंकाओं को खारिज किया है। पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि देश में तेल और गैस का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और आने वाले दिनों में कई अतिरिक्त आपूर्ति वाले जहाज भी भारत पहुंचने वाले हैं। सरकार ने आम जनता से घबराने की बजाय संयम बनाए रखने की अपील की है।

पृष्ठभूमि में देखें तो 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा तेहरान पर किए गए हमले को अब 27 दिन हो चुके हैं। इस संघर्ष में अब तक 3000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में पांच दिन के सीजफायर का ऐलान किया था, लेकिन जमीनी स्तर पर हमले अब भी जारी हैं। एक ओर अमेरिका बातचीत की कोशिशों का दावा कर रहा है, वहीं ईरान ने किसी भी औपचारिक वार्ता से इनकार किया है। ईरान का कहना है कि कुछ सीमित संवाद जरूर हुआ है, लेकिन युद्धविराम को लेकर कोई ठोस चर्चा नहीं हुई है।

कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में जारी यह संकट न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर अस्थिरता पैदा कर रहा है। भारत सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए सक्रिय है और केंद्र-राज्य समन्वय के जरिए संभावित ऊर्जा संकट को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में इस बैठक के फैसले देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

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