फोरकास्ट, बचाव और सुरक्षा: 4P मंत्र से राज्य में नया आपदा सुरक्षा रोडमैप

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की में आयोजित “आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं सहनशीलता” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यशाला में आपदा जोखिम न्यूनीकरण, आपदा-पूर्व तैयारी, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों और सामुदायिक सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। साथ ही तकनीकी नवाचार, अनुसंधान सहयोग और विभिन्न संस्थाओं के बीच साझेदारी को मजबूत करने के लिए ठोस रणनीतियां भी तैयार की जाएंगी।

उन्होंने कहा कि कार्यशाला से प्राप्त सुझाव उत्तराखंड सहित संपूर्ण हिमालयी क्षेत्र के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण राज्य भूकंप, भूस्खलन, बादल फटना, अतिवृष्टि, हिमस्खलन और वनाग्नि जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील है, जिनके दुष्प्रभाव वैज्ञानिक दृष्टिकोण, समयबद्ध तैयारी और सामूहिक प्रयासों से कम किए जा सकते हैं।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए 4P मंत्र—Predict, Prevent, Prepare और Protect—के आधार पर राज्य में 10-सूत्रीय एजेंडा पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार आपदा-पूर्व तैयारी को सशक्त बनाने के लिए एआई आधारित चेतावनी प्रणालियां, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ग्लेशियर रिसर्च सेंटर, ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग, रैपिड रिस्पॉन्स टीमें, फॉरेस्ट फायर अर्ली वार्निंग सिस्टम और वनाग्नि प्रबंधन कार्ययोजना पर निरंतर कार्य कर रही है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन विभाग, वन विभाग, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर प्रभावी आपदा प्रबंधन सुनिश्चित किया जा रहा है।

उन्होंने आईआईटी रुड़की के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान ने भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई है। राज्य सरकार आईआईटी रुड़की के सहयोग से इस प्रणाली के विस्तार, भूस्खलन संवेदनशील क्षेत्रों की मैपिंग और बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणालियों के विकास पर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संतुलन की दिशा में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि पौधारोपण, जल संरक्षण और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं। जल संरक्षण और संवर्धन के लिए स्प्रिंग रीजुविनेशन अथॉरिटी (SARA) द्वारा कार्य किया जा रहा है।

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मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से सुरक्षित आवास और सुदृढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर ध्यान देने तथा अधिकारियों से सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में प्रज्ञा प्रवाह के जोनल कॉर्डिनेटर भगवती प्रसाद राधव, आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के. के. पंत, उपनिदेशक प्रो. यू. पी. सिंह, प्रो. संदीप सिंह सहित विभिन्न राज्यों से आए वैज्ञानिक उपस्थित रहे।

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