Corbetthalchal रामनगर
वन्य प्राणी सप्ताह के चौथे दिन कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में प्रकृति संरक्षण एवं जागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
दिन की शुरुआत पक्षी अवलोकन एवं प्रकृति भ्रमण (बर्ड वॉचिंग एवं नेचर वॉक) से हुई, जिसमें कॉर्बेट वाइल्डलाइफ आर्ट गैलरी ट्रस्ट, रिंगोड़ा, नेचर गाइड एसोसिएशन के सदस्यों एवं प्रकृति मार्गदर्शकों ने स्कूली छात्र-छात्राओं को विभिन्न पक्षियों की प्रजातियों एवं उनके महत्व के बारे में जानकारी दी।
इसी क्रम में हाथी दिवस भी मनाया गया। कालागढ़ एलिफेंट कैंप में श्री बिंदर पाल तथा आमडंडा गेट पर श्री नवीन चंद्र पाण्डेय, वन क्षेत्राधिकारी बिजरानी द्वारा हाथियों के जीवन, व्यवहार एवं उनके संरक्षण संबंधी तथ्यों पर बच्चों को जानकारी दी गई। बच्चों ने हाथियों को अपने हाथों से भोजन भी खिलाया, जिससे वे अत्यंत उत्साहित नजर आए।
इसके बाद कॉर्बेट वन्य जीव प्रशिक्षण केंद्र, कालागढ़ में “वन्य जीवों का महत्व एवं संरक्षण में हमारा योगदान” विषय पर निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें राजकीय इंटर कॉलेज कालागढ़, सरस्वती विद्या मंदिर कालागढ़ एवं सेंट मैरी स्कूल, भिक्कावाला के छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया।
साथ ही, कॉर्बेट म्यूजियम, कालाढूंगी में विद्यार्थियों द्वारा क्ले मॉडलिंग एवं भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस प्रतियोगिता का आयोजन कॉर्बेट ग्राम विकास समिति एवं कॉर्बेट टाइगर रिजर्व द्वारा संयुक्त रूप से जूनियर हाई स्कूल, लामाचौड़ में किया गया।
टाइगर रिजर्व मुख्यालय में चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन “मानव–वन्य जीव सह अस्तित्व” विषय पर किया गया, जिसमें लगभग 120 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया।
दोपहर 1:30 बजे से “बाघ रक्षक आउटरीच कार्यक्रम” अंतर्गत रामनगर स्थित न्यायालय परिसर में वन एवं वन्य जीव संरक्षण हेतु विशेष जागरूकता कार्यक्रम भी संपन्न हुआ। इसमें न्यायालय परिसर के समस्त अधिवक्ताओं एवं स्टाफ को शामिल किया गया। सर्वप्रथम वन्यजीव संरक्षण पर आधारित एक फिल्म का प्रदर्शन किया गया, तत्पश्चात प्रकृतिविद् श्री संजय छिमवाल द्वारा वन्य जीव संरक्षण के महत्व पर संबोधन दिया गया।
कार्यक्रम के अंत में श्री ललित तिवारी, अध्यक्ष बार एसोसिएशन, रामनगर ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम वनकर्मियों एवं न्यायालय में कार्यरत अधिवक्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ समाज में वन एवं वन्यजीव संरक्षण का सकारात्मक संदेश प्रसारित करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि इस प्रकार के कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाते रहने चाहिए।




