आस्था व भक्ति का संगम कैची धाम,15 जून को लगता है, विश्व प्रसिद्व कैची मेला।

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15 जून को लगता है, विश्व प्रसिद्व कैची मेला
इस बार कोरोनावायरस संक्रमण काल के चलते यहां पर मेला आयोजित नहीं हो पाएगा आप घर पर ही रहें सुरक्षित रहें और अपने अपने आराधना के श्रद्धा पुष्प अपने ही घरों से  बाबा को अर्पित करें। आप सभी पर बाबा की कृपा सदैव बनी रहे।*
अलौकिक सिद्वियों के स्वामी थे नीम करौली महाराज*
 आस्था व भक्ति का संगम कैंची धाम* मानव समाज के उत्थान के लिए योगी संतों का समय समय पर इस बसुंधरा में पर्दापण होता रहा है  इसी भूमि पर साधना करके संतों ने संसार में ज्ञान का जो प्रकाश फैलाया उसकी महत्ता समूचा विश्व जानता है,देवभूमि उत्तराखण्ड की धरती में स्थित कैची मंदिर विराट स्वरूप के धनी विश्व प्रसिद्व संत नीम करौली महाराज की अमूल्य धरोहर है, इनकी उपमा परोपकारी संतो में अतुलनीय है   हिमालय की गोद में बसा उत्तराखण्ड का यह क्षेत्र प्रकृति की अमूल्य अलौकिक धरोहर है। यहां की पावन रमणीक वादियों में पहुंचते ही सांसारिक मायाजाल में भटके मानव की समस्त व्याधियां यूं शांत हो जाती है, जैसे अग्नि की लौ पाते ही तिनका भस्म हो जाता है। यहां के एतिहासिक धरोहर रूपी रमणीय गुफाएं, सुंदर मनभावन मंदिर यहां आने वाले हर आगन्तुकों को अपनी ओर आकर्षित करने में पूर्णतः सक्षम हैं। ऋषि-मुनियों की अराधना व तपःस्थली के रूप में प्रसिद्ध इस पावन भूमि के पग-पग पर देवालयों की भरमार है। सुन्दर झरने कल-कल धुन में नृत्य करती नदियां अनायास ही पर्यटकों व श्रद्धालुओं को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं* *देवभूमि उत्तराखण्ड की आलौकिक वादियों में से एक दिव्य रमणीक लुभावना स्थल है ‘कैंची धाम कैंची धाम’ जिसे ‘नीम किरौली धाम’ भी कहा जाता है*, *

उत्तराखण्ड का ऐसा तीर्थस्थल है, जहां वर्ष भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। अपार संख्या में श्रद्धालु व भक्तजन यहां पहुंचकर अराधना व श्रद्धा के पुष्प ‘श्री किरौली महाराज’ के चरणों में अर्पित करते हैं। हर साल 15 जून को यहां एक विशाल मेले का आयोजन होता है। भक्तजन यहां पधारकर अपनी श्रद्धा व आस्था को व्यक्त करते हैं, कहा जाता है कि यहां पर श्रद्धा एवं विनयपूर्वक की गई पूजा कभी भी व्यर्थ नहीं जाती। यहां पर मांगी गई मनौती पूर्णतया फलदायी कही गई है। इस क्षेत्र के आस्थावन भक्त बताते है। ‘बाबा नीम किरौली महाराज’ महान योगीराज थे*

बताया जाता है की इसी तरह 15 जून, 1991 को घटी एक चमत्कारिक घटना के अनुसार ‘कैंची धाम’ में आयोजित भक्तजनों की विशाल भीड़ में बाबा ने बैठे-बैठे इस तरह निदान करवाया कि जिसे यातायात पुलिसकर्मी घंटों से नहीं करवा पाए। थक हार कर उन्होंने बाबा की शरण ली। आखिरकार उनकी समस्याओं का निदान हुआ। यह घटना आज भी खासी चर्चाओं में रहती है।

इसके अलावा एक बार यहां आयोजित भंडारे में ‘घी’ की कमी पड़ गई थी। बाबा जी के आदेश पर नीचे बहती नदी से कनस्तर में जल भरकर लाया गया। उसे प्रसाद बनाने हेतु जब उपयोग में लाया गया तो वह जल में ‘घी’ परिणित हो गया। इस चमत्कार से आस्थावान भक्तजन नतमस्तक हो उठे। एक अन्य चमत्कार के अनुसार ‘बाबा नीम किरौली महाराज’ जी ने एक बार गर्मी की तपती धूप में एक भक्त को बादल की छतरी बनावकार उसे उसकी मंजिल तक पहुंचाया। इस तरह एक नहीं अनेक चमत्कारों की किंवदंतियां जुड़ी हुई हैं ‘नीम किरौली महाराज’ से। जय बाबा नीम करौरी महाराज

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