रामनगर – रचनात्मक शिक्षक मण्डल ने भारतीय आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली दुर्गा चरण बोहरा ,दुर्गा भाभी को आज उनकी एक सौ तेरहवीं जयंती पर उनको याद किया ।रचनात्मक शिक्षक मण्डल की ओर से चल रहे तेलीपुरा में भगतसिंह पुस्तकालय में हुए कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए शिक्षक मण्डल के राज्य संयोजक नवेंदु मठपाल ने उनके जीवन के बारे में बताते हुये कहा कि वे सात अक्टूबर 1907 शहजादपुर गांव में पंडित बांके बिहारी के यहां उन्होंने जन्म लिया।पिता ने संन्यास ले लिया था, रिश्तेदारों ने दस साल की उम्र में शादी करा दी।भगवती चरण वोहरा से ये क्रांतिकारी संगठन हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक आर्मी के मास्टर कहे जाते थे, उनके साथ मिलकर दुर्गा भाभी ने भी आज़ादी की लड़ाई के लिए काम करना शुरू कर दिया। वोहरा की पत्नी होने की वजह से सभा के सभी सदस्य उन्हें भाभी कहते थे। उन्हें पिस्तौल चलाने में महारथ हासिल थी,वे बम बनाना भी जानती थीं।जब उनके बेटे सचिन्द्र का जन्म हुआ, तब उन्होंने क्रांतिकारी गतिविधियों से दूरी बना ली।लेकिन भगत सिंह की मदद के लिए जब उनसे गुजारिश की गई, तो उन्होंने भगतसिंह की पत्नी बन उन्हें बचाया।
आज़ादी के बाद उन्होंने गाज़ियाबाद में रहना शुरू किया ,मारिया मोंटेसरी, जिन्होंने मोंटेसरी स्कूलों की शुरुआत की, उनसे ट्रेनिंग लेकर उन्होंने लखनऊ में मोंटेसरी स्कूल खोला। 15 अक्टूबर 1999 को दुर्गा भाभी इस दुनिया से चली गईं।गिरीश मेंदोला ने कहा आज दुर्गा भाभी जैसी क्रांतिकारी महिलाओं के बारे में समाज को बताना ही होगा। इस मौके पर बालकृष्ण चंद,नन्दराम आर्य,प्रियांशु लखचोरा मौजूद रहे।शिक्षक मण्डल द्वारा संचालित स्कूली बच्चों के ग्रुप जश्न के बचपन में भी बच्चों ने दुर्गा भाभी को याद किया।उनके क्रांतिकारी कार्यों पर प्रकाश डालने के साथ साथ उनका चित्र भी बनाया और चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया।





