उत्तराखंड में सियासत गर्माई हुई है। अंकिता भंडारी हत्याकांड में पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और मामले में कथित वीआईपी की सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर रविवार, 11 जनवरी को कांग्रेस और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने उत्तराखंड बंद का आह्वान किया।
चमोली जिले के गैरसैंण में बंद का व्यापक असर देखा गया। व्यापार संघों और टैक्सी यूनियनों ने भी बंद का समर्थन किया। गैरसैंण के प्रमुख व्यापार संघों और क्षेत्रीय नेताओं ने बाजार और प्रतिष्ठान बंद रखने की घोषणा की। इसके चलते अधिकांश दुकानें और व्यवसाय ठप रहे, जबकि टैक्सी सेवाओं के पहिए भी जाम रहे।
प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेश कुमार बिष्ट ने बताया कि यह बंद पूरी तरह गैर-राजनीतिक है और इसका उद्देश्य केवल पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना है। उन्होंने व्यापारियों से अपील की कि वे बंद में सहयोग करें।
श्रीनगर और पौड़ी में भी बंद का असर देखा गया। नगर क्षेत्रों में अधिकांश बाजार सुबह तक बंद रहे, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। हालांकि, आवश्यक सेवाओं जैसे मेडिकल स्टोर खुले रहे, जबकि शराब की दुकानें संचालित रहीं।
कोटद्वार में बंद का असर मिला-जुला रहा। कुछ क्षेत्रों में दुकानें खुलीं, वहीं अन्य क्षेत्रों में व्यापारियों ने बंद का समर्थन किया। हल्द्वानी, देहरादून, रुड़की, मसूरी, खटीमा और काशीपुर में बंद का कोई असर नहीं देखा गया।




