रामनगर – अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई के जन्मदिन पर खोला पुस्तकालय…
रचनात्मक शिक्षक मण्डल द्वारा रामनगर ब्लाक के सामाजिक,आर्थिक,भौगोलिक रूप से पिछड़े गांवों में स्कूली बच्चों के लिए पुस्तकालय ख़ोले जाने की प्रक्रिया में आज पुछड़ी गांव में पुस्तकालय खोला गया।शिक्षक मण्डल द्वारा यह 13 वां पुस्तकालय खोला गया।भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई के जन्मदिन पर यह पुस्तकालय आज ख़ोला गया।
इस मौके पर बोलते हुए कार्यक्रम संयोजक नवेंदु मठपाल ने कहा विक्रम साराभाई जिन्हें भारत के ‘अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक’ माना जाता है का जन्म 12 अगस्त 1919 को अहमदाबाद में हुआ ।विक्रम साराभाई ने अन्य क्षेत्रों में भी समान रूप से पुरोगामी योगदान दिया। वे अंत तक वस्त्र, औषधीय, परमाणु ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई अन्य क्षेत्रों में लगातार काम करते रहे थे। डॉ. साराभाई एक रचनात्मक वैज्ञानिक, एक सफल भविष्यदृष्टा, सर्वोच्च स्तर के प्रर्वतक, एक महान् संस्थान निर्माता, एक भिन्न प्रकार के शिक्षाविद, कला के पारखी, सामाजिक परिवर्तन के उद्यमी, एक अग्रणी प्रबंधन शिक्षक तथा और बहुत कुछ थे।विक्रम अपनी इंटरमीडिएट विज्ञान की परीक्षा पास करने के बाद अहमदाबाद में गुजरात कॉलेज से मेट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की। उसके बाद वे इंग्लैंड चले गए और ‘केम्ब्रिज विश्वविद्यालय’ के सेंट जॉन कॉलेज में भर्ती हुए। उन्होंने केम्ब्रिज से 1940 में प्राकृतिक विज्ञान में ट्राइपॉस हासिल किया। ‘द्वितीय विश्वयुद्ध’ के बढ़ने के साथ साराभाई भारत लौट आये और बेंगलोर के ‘भारतीय विज्ञान संस्थान’ में भर्ती हुए तथा नोबेल पुरस्कार विजेता सी. वी. रामन के मार्गदर्शन में ब्रह्मांडीय किरणों में अनुसंधान शुरू किया। विश्वयुद्ध के बाद 1945 में वे केम्ब्रिज लौटे और 1947 में उन्हें उष्णकटिबंधीय अक्षांश में कॉस्मिक किरणों की खोज शीर्षक वाले अपने शोध पर पी.एच.डी की डिग्री से सम्मानित किया गया।
साराभाई को ‘भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक’ माना जाता है। अहमदाबाद में ‘भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला’ की स्थापना में उन्होंने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, केम्ब्रिज से 1947 में आज़ाद भारत में वापसी के बाद उन्होंने अपने परिवार और मित्रों द्वारा नियंत्रित धर्मार्थ न्यासों को अपने निवास के पास अहमदाबाद में अनुसंधान संस्थान को धन देने के लिए राज़ी किया। इस प्रकार 11 नवम्बर, 1947 को अहमदाबाद में विक्रम साराभाई ने ‘भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला’ (पीआरएल) की स्थापना की। उस समय उनकी उम्र केवल 28 वर्ष थी। साराभाई संस्थानों के निर्माता और संवर्धक थे और पीआरएल इस दिशा में पहला क़दम था। विक्रम साराभाई ने 1966-1971 तक पीआरएल की सेवा की।
‘परमाणु ऊर्जा आयोग’ के अध्यक्ष पद पर भी विक्रम साराभाई रहे
उन्होंने अहमदाबाद में ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट’, अहमदाबाद की स्थापना में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. साराभाई द्वारा 10 से अधिक सुविख्यात वैज्ञानिक संस्थानों की नींव रखी गयी
‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ (इसरो) की स्थापना उनकी महान् उपलब्धियों में एक थी।
डॉ. साराभाई विज्ञान की शिक्षा में अत्यधिक दिलचस्पी रखते थे। इसीलिए उन्होंने 1966 में सामुदायिक विज्ञान केंद्र की स्थापना अहमदाबाद में की। आज यह केंद्र ‘विक्रम साराभाई सामुदायिक विज्ञान केंद्र’ कहलाता है। 1966 में नासा के साथ डॉ. साराभाई के संवाद के परिणामस्वरूप जुलाई, 1975 से जुलाई, 1976 के दौरान ‘उपग्रह अनुदेशात्मक दूरदर्शन परीक्षण’ (एसआईटीई) का प्रमोचन किया गया। डॉ. साराभाई ने भारतीय उपग्रहों के संविरचन और प्रमोचन के लिए परियोजनाएँ प्रारंभ कीं। इसके परिणामस्वरूप प्रथम भारतीय उपग्रह आर्यभट्ट, रूसी कॉस्मोड्रोम से 1975 में कक्षा में स्थापित किया गया।उनकी मृत्यु 30 दिसम्बर 1931 को हुई।
ख़ोले गए पुस्तकालय में स्कूली बच्चों के लिए सरल तरीके से लिखी गयी विज्ञान की किताबें उपलब्ध कराई गई हैं।इस मौके पर बालकृष्ण चंद,प्रियांशु लखचोरा,: जतिन लखचोरा,अर्जुन नेगी,शम्मी नैनवाल,अक्षिता पाठक,दीपक बलोदी,मयंक बलोदी, रोहित खत्री मौजूद रहे




