*धामी सरकार की पहल से जनजातीय क्षेत्रों में बदलाव की बयार , नैनीताल के रामनगर में ₹2.50 करोड़ की NABARD परियोजना से बुक्सा परिवारों को मिल रही नई आजीविका
जनजातीय विकास को मिली नई दिशाl
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में NABARD के सहयोग से जनपद नैनीताल के रामनगर विकासखंड में जनजातीय विकास निधि (TDF) परियोजना के अंतर्गत बुक्सा जनजाति के परिवारों के लिए सतत आजीविका विकास के व्यापक कार्य संचालित किए जा रहे हैं।
लगभग ₹2.50 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना में NABARD द्वारा करीब ₹1.55 करोड़ का अनुदान प्रदान किया गया है। परियोजना को 10 सितम्बर 2025 को स्वीकृति मिली थी और वर्तमान में इसका क्रियान्वयन तेजी से किया जा रहा है।
इस योजना के तहत रामनगर ब्लॉक के थारी, राजपुर, पिपलसाना, बेरिया एवं ललितपुर गांवों के जनजातीय परिवारों को सीधे लाभान्वित किया जा रहा है।
बहुआयामी आजीविका गतिविधियां
परियोजना के अंतर्गत जनजातीय परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जिनमें बाड़ी विकास, बकरी पालन, मधुमक्खी पालन, जल संरक्षण, महिलाओं के लिए स्वरोजगार गतिविधियां तथा क्षमता विकास प्रशिक्षण शामिल हैं।
विशेष रूप से 100 कृषकों को बाड़ी विकास से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें फलदार पौधों का रोपण, अंतर्वर्ती खेती एवं आय संवर्धन गतिविधियां शामिल हैं। इसके साथ ही 100 परिवारों को बकरी पालन इकाइयों से जोड़ने की योजना बनाई गई है।
परियोजना के तहत बकरी पालन गतिविधियों का संचालन प्रारंभ हो चुका है। प्रथम चरण में 20 जनजातीय कृषकों को इससे जोड़ा जा चुका है। लाभार्थियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उन्नत नस्ल की बकरियां उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे उनकी आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित हो सके।
बाड़ी विकास कार्य प्रगति पर
बाड़ी विकास के अंतर्गत भूमि तैयारी एवं गड्ढा खोदाई का कार्य तेजी से चल रहा है। आगामी रोपण सत्र को ध्यान में रखते हुए फलदार पौधों के रोपण की तैयारियां पूर्ण की जा रही हैं।
इसके साथ ही जल संरक्षण, जैविक खाद के उपयोग तथा वन्य एवं आवारा पशुओं से सुरक्षा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जा रही हैं।
परियोजना के निरीक्षण के दौरान श्री मुकेश बेलवाल ने लाभार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि NABARD की इस परियोजना का उद्देश्य जनजातीय परिवारों की आय में स्थायी वृद्धि करना और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना है।
उन्होंने क्रियान्वयन एजेंसी को निर्देश दिए कि सभी कार्य स्वीकृत कार्ययोजना एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप समयबद्ध ढंग से पूर्ण किए जाएं। साथ ही गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, पशुधन चयन, प्रशिक्षण एवं नियमित अनुश्रवण पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
विभागीय समन्वय से मिलेगा अधिक लाभ
परियोजना के अंतर्गत कृषि, उद्यान, पशुपालन एवं अन्य विभागीय योजनाओं के साथ अभिसरण स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि लाभार्थियों को अधिकतम लाभ प्राप्त हो सके।
इसके साथ ही महिलाओं के लिए स्वरोजगार गतिविधियों एवं क्षमता विकास कार्यक्रमों को प्राथमिकता देते हुए सामुदायिक संस्थाओं को सशक्त बनाने पर बल दिया गया है।
आत्मनिर्भर उत्तराखंड की ओर मजबूत कदम
यह परियोजना मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की “आत्मनिर्भर उत्तराखंड” की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से जनजातीय परिवारों को दीर्घकालिक एवं अल्पकालिक दोनों प्रकार के आय स्रोत उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
निश्चित रूप से यह पहल न केवल जनजातीय परिवारों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करेगी, बल्कि क्षेत्र में सतत आजीविका विकास का एक प्रभावी मॉडल भी स्थापित करेगी।




