सालम क्रांति दिवस: राइंका ढेला में याद किए गए 1942 के वीर संग्रामी

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सालम क्रांति दिवस पर सालम के संग्रामियों को किया याद…
1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 25 अगस्त को अल्मोड़ा जिले के सालम जैंती इलाके में हुए विद्रोह के संग्रामियों को आज राजकीय इंटर कालेज ढेला में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से याद किया गया।प्रातःकालीन सभा में मानसी,रोशनी, भावना,खुशी,प्रिंस,
जतिन,लोकेश की टीम ने उस दौर में सालम के संग्रामी प्रताप बोरा द्वारा लिखित गीत उठो, हिटो ददा भूलियो का सामूहिक वाचन किया।
अंग्रेजी प्रवक्ता नवेंदु मठपाल ने उस क्रांति के बाबत जानकारी देते हुए बताया कि
‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में कुमाऊं के जनपद अल्मोड़ा में स्थित सालम पट्टी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. अल्मोड़ा जनपद के पूर्वी छोर पर बसे सालम क्षेत्र को पनार नदी दो हिस्सों में बांटती है. यहां की 25 अगस्त 1942 की अविस्मरणीय घटना इतिहास के पन्नों में ‘सालम की जनक्रांति’ के नाम से जानी जाती है.
राम सिंह धौनी
उन्नीसवीं सदी के अंत तक कुमाऊं के अन्य जगहों की भांति इस पिछड़े क्षेत्र में भी स्वतंत्रता संग्राम की अलख जल चुकी थी. 1938 में सालम के एक और क्रांतिकारी रामसिंह आजाद भी स्वराज्य आंदोलन में सक्रिय हो गये.

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1941 में महात्मा गांधी के सविनय अवज्ञा आंदोलन का असर सालम में भी पड़ा कई जगहों पर सत्याग्रहों का दौर चला जिसमें यहां के दो दर्जन के करीब कांग्रेसी कार्यकताओं को गिरफ्तार कर उन्हें अल्मोड़ा जेल भेज दिया गया. सालम के प्रवेश द्वार शहरफाटक में 23 जून 1942 को मण्डल कांग्रेस के तत्वाधान में एक बड़ी सभा आयोजित की गयी. जिसमें हर गोविन्द पंत ने झण्डा फहराया. 1 अगस्त 1942 को तिलक जयन्ती पर सालम के 11 जगहों पर झण्डा फहराने का निर्णय किया. मुम्बई में अखिल भारतीय

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सालम में भी 11 अगस्त को पटवारी दल सांगण गांव में रामसिंह आजाद के घर पंहुचा जहां बड़ी संख्या में कौमी दल के स्वयंसेवक मौजूद थे. रामसिंह आजाद शौच के बहाने से फरार हो गये. 19 अगस्त को स्वयंसेवकों के सचल दल की जब नौगांव में आगामी कार्यक्रमों की रूप रेखा तय की जा रही थी तो प्रशासन के पुलिस बल ने गांव को चारों तरफ से घेरे दिया और बैठक में शामिल 14 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया. गांवों में खबर फैलते ही लोग रात में ही एकत्रित हो गये. भीड़ के तेवर देखकर पुलिस का अमला बुरी तरह घबरा गया. गिरफ्तार स्वयंसेवकों को एक ओर बैठाकर जनता ने पुलिस बल को ललकारते हुए इन स्वयंसेवकों को छोड़ने को कहा।25 अगस्त की सुबह सूचना मिली कि गोरों की फौज पूरी शक्तिबल के साथ पहुंच गयी है जिसे कुमाऊं कमिश्नर ओर से सालम की बगावत का सख्ती से दमन करने के आदेश मिले .अंग्रेज सेना ने आंदोलनकारियों पर गोली चला दी।सालम के गोलीकाण्ड में दो लोगों के शहीद होने के साथ ही 200 से ज्यादा लोगों को चोटें आयी थी.बच्चों ने इस मौके पर सालम क्रांति से संबंधित डाक्यूमेंट्री भी देखी।
इस मौके पर मनोज जोशी,नवेंदु मठपाल,महेंद्र आर्य, शैलेंद्र भट्ट,दिनेश निखुरपा, जया बाफिला, उषा पवार, नरेश कुमार,संजीव कुमार,प्रदीप शर्मा, पदमा,हेमलता जोशी मौजूद रहे।

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