हरिद्वार स्थित प्राचीन अवधूत मंडल आश्रम में आयोजित संत समागम में केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग किया। दोनों नेताओं ने ‘एक राष्ट्र–एक चुनाव‘ के विषय पर संत समाज से संवाद करते हुए इसे देश की निरंतर प्रगति, सुशासन और संसाधनों के संरक्षण के लिए आवश्यक बताया। केंद्रीय मंत्री ने बार-बार होने वाले चुनावों को विकास कार्यों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में बाधक बताते हुए संत समाज से इस राष्ट्रीय पहल के समर्थन में जनजागरण करने का आह्वान किया।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि निरंतर चुनावी प्रक्रियाओं के कारण शिक्षण कार्य प्रभावित होता है, प्रशासनिक अमला व्यस्त रहता है और भारी मात्रा में सार्वजनिक धन का व्यय होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विषय किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि ‘देश पहले, पार्टी बाद में’ के संकल्प से जुड़ा है। यदि लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ संपन्न हों, तो इससे समय, धन और प्रशासनिक ऊर्जा की बड़ी बचत होगी, जिसे जनकल्याण और बुनियादी विकास में लगाया जा सकेगा। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में वंदे मातरम के पूरे स्वरूप के प्रति जनभावना जगाने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि बार-बार चुनाव होने और आदर्श आचार संहिता लागू रहने से नीतिगत निर्णय तथा विकास की निरंतरता बाधित होती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत-2047’ के संकल्प को पूरा करने के लिए सुशासन और अबाध विकास आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने सनातन परंपरा में संतों की मार्गदर्शक भूमिका को रेखांकित करते हुए उनसे इस राष्ट्रीय विषय पर समाज को जागरूक करने और सही दिशा देने की अपील की।




