बुधवार को हरिद्वार के प्रेमनगर आश्रम में पूज्य मोरारी बापू की नौ दिवसीय भव्य ‘श्रीराम कथा’ का समापन समारोह आयोजित हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस आध्यात्मिक समागम में उमड़े विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार की पावन धरा पर उन्हें अद्वितीय आध्यात्मिक सुख और आनंद की अनुभूति हो रही है। उन्होंने विश्वभर में सनातन संस्कृति, भारतीय दर्शन और भगवान राम के जीवन आदर्शों को प्रवाहित करने के लिए पूज्य मोरारी बापू का हृदय से आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने वैश्विक अशांति का उल्लेख करते हुए कहा कि आज जब पूरी दुनिया युद्ध, हिंसा और आतंकवाद जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, तब भारत की सनातन संस्कृति का ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का संदेश ही पूरी मानवता का सच्चा मार्गदर्शक है।


मुख्यमंत्री ने मंच से साझा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में चल रहे सांस्कृतिक पुनर्जागरण के बीच उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन और आध्यात्मिक यात्राओं ने इस वर्ष सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष की चारधाम यात्रा में पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त हो चुके हैं और मात्र दो महीने के भीतर ही ४५ लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इसी प्रकार, हेमकुंड साहिब यात्रा में डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मत्था टेका है, जबकि कैलाश मानसरोवर यात्रा में भी ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है और ५५,००० से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जहाँ पहले पूरे वर्ष में बेहद सीमित संख्या में ही यात्रियों को भेजा जाता था। उन्होंने बीते ५ जुलाई को टनकपुर मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा के प्रथम दल को स्वयं हरी झंडी दिखाकर रवाना करने को अपना सौभाग्य बताया और इसे राज्य के बेहतर बुनियादी ढांचे व सुरक्षित यात्रा प्रबंधन का प्रमाण माना।

उत्तराखंड को वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र और विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने की कार्ययोजना पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार ‘विकास भी और विरासत भी’ के मूलमंत्र पर तेजी से काम कर रही है। इसी उद्देश्य के तहत कुमाऊं और गढ़वाल के प्राचीन मंदिरों को जोड़ने के लिए केदारखंड-मानसखंड मंदिर माला मिशन, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर तथा चम्पावत में शारदा कॉरिडोर जैसी बड़ी बुनियादी परियोजनाओं को धरातल पर उतारा जा रहा है। आगामी महाकुंभ को लेकर राज्य सरकार के संकल्प को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष २०२७ में हरिद्वार में आयोजित होने वाला कुंभ केवल आस्था का आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक चेतना और सनातन संस्कृति का महापर्व है, जिसे पूरी तरह दिव्य, भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार अभी से प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी और जिलाधिकारी मयूर दीक्षित सहित भारी संख्या में संत समाज और श्रद्धालु उपस्थित रहे।




