उत्तराखंड विधानसभा में जनसंख्या नियंत्रण कानून पर छिड़ी बहस

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उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण में जनसंख्या नियंत्रण कानून का मुद्दा सदन में जोर-शोर से उठा। भाजपा विधायक शिव अरोड़ा ने नियम 300 के तहत ध्यानाकर्षण प्रस्ताव रखते हुए राज्य में बदलते जनसंख्या संतुलन को लेकर चिंता जताई और सरकार से जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की मांग की।

सदन में बोलते हुए शिव अरोड़ा ने कहा कि राज्य में डेमोग्राफिक बदलाव को देखते हुए सरकार को गंभीर कदम उठाने की जरूरत है। उनका आरोप था कि एक विशेष वर्ग में धार्मिक आधार पर जनसंख्या बढ़ाने की प्रवृत्ति दिखाई दे रही है, जिसे रोकने के लिए राज्य में सख्त जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि ऐसा कानून लाया जाता है तो तीन से अधिक बच्चों वाले परिवारों को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित किया जाना चाहिए। इसमें सरकारी राशन, आयुष्मान कार्ड, गैस कनेक्शन समेत अन्य सरकारी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं।

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अरोड़ा ने यह भी कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां समान नागरिक संहिता लागू की गई है और मदरसा बोर्ड को समाप्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। इसी तरह राज्य सरकार को जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करने की दिशा में भी पहल करनी चाहिए।

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हालांकि, उनके इस बयान का कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि किसी एक समुदाय को निशाना बनाना उचित नहीं है। उनके अनुसार जनसंख्या का मुद्दा राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी के 25 बच्चे होने जैसी बातें व्यावहारिक नहीं हैं।

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गौरतलब है कि 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तराखंड में एक विशेष समुदाय की आबादी लगभग 14 प्रतिशत थी, जो अब विभिन्न अनुमानों के मुताबिक करीब 18 प्रतिशत के आसपास बताई जा रही है। इसके अलावा राज्य में बाहरी राज्यों से आकर बसने वाले लोगों को लेकर भी समय-समय पर राजनीतिक बहस होती रही है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाता नजर आ रहा है।

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