सामाजिक,आर्थिक रूप से वंचित बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रख बन रहे पाठ्यक्रम निर्माण समिति की टीम ने आज बच्चों के साथ सांवल्दे में स्थित लगभग 200 बीघे में स्थित एक बगीचे का भ्रमण और अवलोकन किया। जोतिबा फुले,सावित्रीबाई फुले सायंकालीन स्कूल से जुड़े 30 से अधिक बच्चों ने इस भ्रमण के दौरान आम,कटहल,लीची,अमरूद,आंवले की विभिन्न किस्मों,वृक्षों की देखभाल,सिंचाई आदि के बारे में जाना। फल उत्पादक अंकित बेलवाल ने बच्चों को बगीचे के सभी पहलुओं के बारे विस्तार से अवगत कराया। अंकित बेलवाल ने बताया कि बगीचे में वानिकी के नियमों के तहत हर पेड़ को लगाने का एक नीयत स्थान तय होता है किसी भी पेड़ को कहीं भी नहीं लगाया जा सकता। आम और लीची के बगीचे में हमेशा बाहर की ओर कटहल के पेड़ लगाए जाते हैं ताकि वे समय समय पर आने वाली आंधी,तूफान के वेग को कम कर दें और आम ,लीची का कम नुकसान हो। उन्होंने बताया कि अपने देश में आम की एक हजार से ज्यादा किस्में पाई जाती हैं और गांव देहात में आम से दर्जनों खाद्य पदार्थ बनाए जाते हैं।
उनके द्वारा जानकारी दी गई कि आम की नई किस्मों को कृषि वैज्ञानिकों द्वारा प्रयोगशाला में भी तैयार किया जाता है।शाम के सत्र में विद्यार्थियों ने सुबह के अनुभवों पर आधारित चित्र बनाए ओऱ अनुभव लेखन किया। बच्चों ने अपने लिखा प्रस्तुत किया व एक दूसरे की सराहना की। एस सी ई आर टी देहरादून में विद्यालयी शिक्षा पाठ्यक्रम नियम समिति के सदस्य रहे मदन पाण्डेय ने कहा हमारी स्कूल प्रणाली में प्रत्यक्ष अनुभवों की जगह बहुत कम है। जब विद्यार्थी सीधे
भ्रमण अवलोकन के अनुभव लेते हैं , तब यदि इन अनुभवों को लिख कर या चित्र बना कर पुनरुत्पादित किया जाए तो यह सीखने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण होता है।बार बार इस प्रकार अनुभव से सीखना बच्चे के ज्ञान को गहरा करता है।कार्यक्रम संयोजक नवेंदु मठपाल ने बताया कि इन गतिविधियों से सायंकालीन स्कूल के पाठ्यक्रम निर्माण की सामग्री प्राप्त होगी। इस दौरान कार्यक्रम संयोजक नवेंदु मठपाल,मदन पांडे,अंकित बेलवाल,नंदराम आर्य,रितु बेलवाल,वंदना,सुमित कुमार मौजूद रहे।




