वंचित समुदाय के बच्चों के लिए 7 दिवसीय पाठ्यक्रम निर्माण कार्यशाला की शुरुआत…
रचनात्मक शिक्षक मंडल किनपहल पर सामाजिक आर्थिक रूप से पिछड़े समाज के बच्चों के लिए सात दिवसीय पाठ्यक्रम निर्माण कार्यशाला आज सांवल्दे में विधिवत शुरू हो गई। जोतिबा फुले,सावित्रीबाई फुले सायंकालीन स्कूल सांवल्दे में हो रही इस कार्यशाला की शुरुआत शिक्षक राज पांडे द्वारा यश मालवीय की कविता दबे पैरों से उजाला आ रहा है और हरीश चंद्र हरिमन दा ‘ द्वारा गिरीश तिवारी गिर्दा के गीत उत्तराखंडा
मेरी मातृभूमि से हुईं
उसके पश्चात एन सी ई आर टी द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर बनाए जाने वाले पाठ्यक्रम से जुड़े दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रोफेसर विकास गुप्ता,शिक्षा विभाग की प्रोफेसर राधिका मेनन द्वारा भेजे गए शुभकामना संदेशों को पढ़ा गया। उसके पश्चात विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने विद्यालय की पाठ्यचर्या की रूपरेखा पर विचार विमर्श किया। विभिन्न क्षेत्रों पर्यावरण, विज्ञान, भाषा, गणित, खेल , संगीत आदि के इन आमंत्रित विशेषज्ञों और शिक्षकों ने विद्यालय सिस्टम को सपोर्ट करने के लिए कुछ नवाचार प्रस्तावित किया जो स्कूलों में पाठ्यक्रम के दबाव के कारण नहीं हो पाते। जैसे वर्ड वाचिंग, अनाज उगाने की प्रक्रिया, परिवेश की विभिन्न चीजों में पैटर्न देखना, स्थानीय रीति रिवाज़ो, पर्व, त्योहारों का अध्ययन आदि । उपस्थित विभिन्न क्षेत्रों से आए 30 से अधिक विषय विश्लेषज्ञों ने एक बहुकक्षा, बहुस्तरीय पाठ्यचर्या- पाठ्यक्रम बनाने पर सहमति जताई। जिसमें समावेशित अधिगम पर जोर हो, कक्षाओं के बीच का बंधन लचीला हो, और विभिन्न आयु वर्ग के बच्चों के साथ बैठकर सीख सकें। स्कूलों में पढ़ने में पीछे रह गए बच्चों को भी इस पाठ्यचर्या- पाठ्यक्रम से मदद मिले।
पाठ्यचर्या निर्माण कार्यशाला में विभिन्न विषयों के शिक्षण के लिए अपनाई जाने वाली पद्धतियों पर चर्चा की गई ताकि शिक्षण बोझीला न हो और बाल मनोविज्ञान के अनुरूप हो ।प्राकृतिक पैटर्न से गणित शिक्षण , स्थानीय संदर्भों की पाठ्यक्रम स्थान देने, खेलकूद, कला, व मनोरंजन को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने पर चर्चा की गई ।पाठ्यक्रम इस प्रकार हो कि उसे बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित हो, भाषा सरल हो संपूर्ण गतिविधियों का केंद्र बच्चों की प्रसन्नता को बनाया जाए , ऐसे पाठ्यक्रम निर्माण पर चर्चा की गई। यह माना गया कि परंपरागत पाठ्यक्रम बच्चों की खुशी को केंद्र में रखने में असफल रहा है अतः इस पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत है।
इस मौके एस सी ई आर टी पाठ्यक्रम निर्माण समिति से जुड़े मदन मोहन पांडे,हेमलता तिवारी,राष्ट्रीय कोच देवेंद्र भट्ट, डा नरेंद्र सिजवाली,निर्मल नियोलिया, पक्षीविद राजेश भट्ट,जितेंद्र बिष्ट, डा महेश बवाड़ी,सी पी खाती,मुरलीधर कापड़ी , पहेमंत कुमार, हरीश हरिमन्दा , भगवती प्रसाद पंत, प्रकाश चंद्र फूलोरिया, उमेश चंद्र तिवारी, वीरा अनंत, डॉक्टर साक्षी, अनिता चौहान, सोनी बिष्ट, नवेन्दु मठपाल, राजेंद्र पांडे, सुमित कुमार, सोभा न्योलिया, अंकित बेलबाल, सुजल कुमार, बाल कृष्ण चंद्र, लविश बेलवाल, रितु बेलवाल, वंदना, रिंकी मौजूद रहे।




