राजकीय शिक्षक संघ के बाद अब प्राथमिक शिक्षक संघ ने भी फूंका विरोध का बिगुल

ख़बर शेयर करें -

उप शिक्षा अधिकारी एवं खंड शिक्षा अधिकारी का प्रभार मिनिस्टीरियल कर्मचारियों को दिए जाने एवं शिक्षकों की वार्षिक गोपनीय आख्या में गैर सरकारी संगठन,जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षेप को लेकर अब प्राथमिक शिक्षक संघ भी मुखर हो उठा है।

संगठन ने इस बाबत मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री,शासन एवं निदेशालय स्तर पर अपना विरोध दर्ज कर दिया है। संगठन का कहना है कि यदि इस तरह का असंवैधानिक एवं अव्यवहारिक आदेश थोपा गया तो प्राथमिक शिक्षक संघ इसका पुरजोर विरोध करेगा।

यह भी पढ़ें 👉  सुशासन की दिशा में बड़ा कदम: 4 जुलाई से फिर शुरू होगा 'जन जन की सरकार-जन जन के द्वार' अभियान; सीएम धामी के निर्देश पर 15 दिनों का विशेष सेवा पखवाड़ा

उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने इन निर्णय को तुगलकी फरमान बताते हुए कहा की लंबे समय से प्रारंभिक शिक्षा एवं शिक्षकों की समस्याओं का कोई निदान नहीं हो पा रहा है बल्कि इसके विपरीत जाकर अनेक शिक्षा एवं शिक्षक विरोधी निर्णय थोपे जा रहे हैं जिसे लेकर प्रदेश के शिक्षकों में भारी आक्रोश है।

यह भी पढ़ें 👉  मानसून से निपटने को धामी सरकार तैयार: देहरादून में राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल; आपदा प्रबंधन के लिए AI और ड्रोन तकनीक का होगा इस्तेमाल

संगठन के प्रतिनिधि मनोज तिवारी ने कहा की आगामी 9 जून को इस विषय पर पदम सिंह शिक्षक भवन देहरादून में प्रदेश के समस्त 13 जनपदों के पदाधिकारी के साथ प्रांतीय तदर्थ समिति पदाधिकारी की संयुक्त बैठक होनी निश्चित हुई है।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखण्ड में 'वन नेशन-वन एजुकेशन' की ऐतिहासिक शुरुआत: मदरसा बोर्ड समाप्त; सीएम धामी ने किया 'अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण' का शुभारंभ

जिसमें संगठन के निर्वाचन के साथ-साथ इन शिक्षक विरोधी मुद्दों परआगामी रणनीति पर चर्चा कर निर्णय लिए जाएंगे।
उन्होंने शीघ्र ही इन आदेशों को व्यापक छात्रहित के दृष्टिगत तत्काल वापस दिए जाने की मांग की है।

Ad_RCHMCT