दो जगह वोटर आईडी? सावधान! आधार से पकड़े जाएंगे, हो सकती है जेल

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यदि किसी मतदाता का नाम पैतृक गांव और वर्तमान निवास स्थान, दोनों जगहों की मतदाता सूची में दर्ज है, तो यह स्थिति अब भारी पड़ सकती है। दो अलग-अलग स्थानों पर मतदाता पंजीकरण न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि इसके लिए कड़ी कानूनी सजा का भी प्रावधान है।

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत मतदाता सूची में जानबूझकर गलत जानकारी देना या एक से अधिक जगह नाम दर्ज कराना अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर एक साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं।

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उत्तराखंड जैसे राज्यों में शिक्षा और रोजगार के कारण बड़े पैमाने पर पलायन होता है। इसी वजह से कई लोग गांव और शहर—दोनों जगहों की मतदाता सूची में अपना नाम बनाए रखते हैं। हालांकि अब चुनाव आयोग की उन्नत तकनीक ने इस तरह की गड़बड़ियों पर लगाम कस दी है। आधार लिंकिंग और डेमोग्राफिक सिमिलरिटी सॉफ्टवेयर के जरिए यदि किसी व्यक्ति की फोटो या विवरण दो सूचियों में पाया जाता है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर देता है। डेटा मिलान से दोहरे मतदाताओं की पहचान अब बेहद आसान हो गई है।

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निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और सरल बना दिया है। मतदाता वोटर हेल्पलाइन ऐप या राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल (NVSP) के माध्यम से ऑनलाइन फॉर्म-7 भरकर उस विधानसभा क्षेत्र से अपना नाम हटवा सकते हैं, जहां वे अब निवास नहीं करते।

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सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तु दास ने कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव के लिए मतदाता सूची का शुद्धिकरण आवश्यक है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे स्वेच्छा से आगे आएं और एक स्थान से अपना नाम हटवाएं, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।

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