80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय परिसर में आयोजित समारोह में स्वतंत्रता सेनानियों एवं अमर बलिदानियों को नमन करते हुए ‘विकसित भारत के साथ विकसित उत्तराखण्ड’ और सुशासन का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि 25 वर्षों की यात्रा में उत्तराखण्ड ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। इसके साथ ही उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और हिमालयी पारिस्थितिकी के संरक्षण जैसी चुनौतियों पर निरंतर प्रभावी कार्य करने की आवश्यकता जताई।

मुख्य सचिव ने प्रशासन को केवल फाइलों के निस्तारण तक सीमित न रखकर ‘आउटकम डिलीवरी’ (परिणाम आधारित कार्यशैली) की ओर ले जाने का स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन की वास्तविक सफलता जनता के जीवन में आने वाले सकारात्मक सुधार से तय होती है। ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ की भावना के अनुरूप उन्होंने एआई (AI), डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल तकनीक का अधिकतम उपयोग कर प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, संवेदनशील और नागरिक-केंद्रित बनाने पर जोर दिया।

पर्वतीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उन्होंने मिलेट्स, स्थानीय कृषि, बागवानी, जड़ी-बूटियों और हस्तशिल्प को आधुनिक व वैश्विक बाजारों से जोड़ने तथा महिला स्वयं सहायता समूहों को ग्रामीण उद्यमिता के केंद्रों के रूप में विकसित करने की बात कही। इसके अतिरिक्त, युवाओं को स्टार्टअप व नवाचार के जरिए स्थानीय स्तर पर ही रोजगार प्रदाता बनाने, हिमालय-संवेदनशील व आपदा-रोधी विकास मॉडल अपनाने और पर्यावरण संरक्षण के साथ ‘सस्टेनेबल एवं हाई-वैल्यू टूरिज्म’ को बढ़ावा देने का आह्वान किया।




