मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को हल्द्वानी में ‘जागरण विमर्श-उत्तराखण्ड : आशाएं और चुनौतियां’ कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि राज्य सरकार ‘इकोलॉजी और इकॉनमी’ के बीच संतुलन साधते हुए प्रदेश को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने राज्य की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि राज्य गठन के समय ₹4 हजार करोड़ से शुरू हुआ बजट आज लगभग ₹1.11 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है और प्रति व्यक्ति आय में 41 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा, नीति आयोग के एसडीजी इंडिया इंडेक्स (2023-24) में उत्तराखण्ड और केरल ने संयुक्त रूप से देश में प्रथम स्थान हासिल किया है, जबकि होम-स्टे की संख्या में करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के जरिए राज्य के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है, वहीं महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक संबल देने के लिए ₹5 लाख तक के ब्याजमुक्त ऋण की सुविधा दी गई है। युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार ने देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया, जिसके तहत गड़बड़ी करने वाले 100 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की गई और करीब 35 हजार युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां दी गईं। साथ ही, बच्चों को आधुनिक व तकनीकी शिक्षा से जोड़ने के लिए अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था लागू की गई है और आगामी हरिद्वार कुंभ मेला-2027 को सुरक्षित, भव्य एवं दिव्य रूप से आयोजित करने की तैयारियां जारी हैं।

हिमालयी क्षेत्रों की पर्यावरणीय संवेदनशीलता और जलवायु परिवर्तन को बड़ी चुनौती बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों की वहन क्षमता (कैरिंग कैपेसिटी) का वैज्ञानिक आकलन कराया जा रहा है तथा ग्लेशियरों व हिमनद झीलों की निरंतर निगरानी की जा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकास केवल बड़ी परियोजनाओं तक सीमित न रहकर समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे, साथ ही इस पूरी विकास यात्रा में देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान, विशिष्टता और विरासत का संरक्षण भी सर्वोच्च प्राथमिकता पर रहे।




