बिजली का हिसाब-किताब जनता के लिए नहीं, अधिकारी खुद भुगतेंगे – विधायक का फैसला

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उत्तराखंड में बिजली कटौती को लेकर असंतोष पनप रहा है। आलम यह है कि ऊर्जा प्रदेश में बिजली कब आ रही है और कब जा रही है इसका किसी को पता नहीं चल पा रहा है। इस बीच प्रदेश में एक हैरान कर देने वाला वाकया सामने आया है। 

हरिद्वार जिले की झबरेड़ा विधानसभा से कांग्रेस विधायक वीरेंद्र जाति का गुस्सा देखने को मिला। लगातार हो रही बिजली कटौती से नाराज विधायक ने मंगलवार को रुड़की में बिजली विभाग के अधिकारियों के आवासों की बिजली खुद ही काट दी। इस दौरान वे लाइनमैन की तरह खंभे पर चढ़ते और प्लास लगाते भी नजर आए।

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करीब 15 दिन पहले विधायक ने विद्युत विभाग के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता अमित कुमार से मुलाकात कर ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती रोकने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि सुबह और शाम बिजली कटने से जनता की दिनचर्या प्रभावित हो रही है, बच्चे और बुजुर्ग परेशान हैं, और लोगों ने कई बार इस समस्या का समाधान मांगा है।

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विधायक ने चेतावनी दी थी कि अगर एक हफ्ते के भीतर सुधार नहीं हुआ, तो वे स्वयं अधिकारियों के आवासों की बिजली काट देंगे। अधीक्षण अभियंता का तबादला हो चुका था, लेकिन बिजली आपूर्ति में कोई सुधार नहीं हुआ। समय सीमा खत्म होने के बाद 23 दिसंबर को विधायक वीरेंद्र जाति ने रुड़की में अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता और अन्य अधिकारियों के आवासों की बिजली काट दी।

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वीरेंद्र जाति ने कहा, “जो परेशानी जनता झेल रही है, वही अधिकारी भी झेलेंगे। जनता का हक की बिजली किसी की मर्जी पर नहीं चलेगी।” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था जल्द दुरुस्त नहीं की गई, तो जेई, एसडीओ समेत अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की बिजली लाइन भी काटी जाएगी।

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