विश्व पर्यावरण दिवस 2026: 12,000 पौधारोपण और 10,000 पौधों के वितरण के साथ देखिये कल्पतरू की अनूठी पहल

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विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जब देशभर में पर्यावरण संरक्षण की बातें हो रही हैं, तब रामनगर क्षेत्र की सामाजिक संस्था कल्पतरू पिछले 15 वर्षों से इस दिशा में लगातार और निस्वार्थ भाव से कार्य कर रही है। वर्ष 2011 से शुरू हुई यह मुहिम आज एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुकी है।

कल्पतरू की पहचान केवल पौधे लगाने वाली संस्था के रूप में नहीं, बल्कि पौधों को बड़ा करने और उनकी देखभाल करने वाली टीम के रूप में बनी है। संस्था का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल फोटो खिंचवाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पौधों को वृक्ष बनने तक संरक्षित करना ही वास्तविक सेवा है।

कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं कर चुका है कल्पतरू

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संस्था द्वारा अब तक फाइकस गार्डन, कुंवर दामोदर पार्क जैसी महत्वपूर्ण हरित परियोजनाएं विकसित की जा चुकी हैं। इसके अलावा वर्तमान में कल्पतरू वन को विकसित किया जा रहा है, जो अब धीरे-धीरे जंगल का स्वरूप लेने लगा है।

जन्मदिन, विवाह और पुण्य स्मृति पर पौधारोपण

कल्पतरू टीम लोगों को जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ और अन्य विशेष अवसरों पर पौधारोपण के लिए प्रेरित करती है। संस्था की एक अनूठी पहल यह भी है कि दिवंगत व्यक्तियों की दाह संस्कार की राख से पौधे रोपे जाते हैं, जिससे परिजन अपने प्रियजन की स्मृतियों को एक जीवंत वृक्ष के रूप में महसूस कर सकें।

भागवत कथा और विवाह समारोहों में पौधे बन रहे प्रसाद और उपहार

संस्था द्वारा भागवत कथाओं में पौधों को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। वहीं विवाह समारोहों में “पौध पानी ग्रह” की परंपरा के तहत मेहमानों को रिटर्न गिफ्ट के रूप में 100 वर्ष से अधिक आयु वाले वृक्षों की प्रजातियों के पौधे भेंट किए जाते हैं। इससे समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

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12 हजार पौधारोपण और 10 हजार से अधिक पौधों का वितरण

कल्पतरू टीम अब तक लगभग 12,000 पौधे रोपित कर चुकी है, जबकि 10,000 से अधिक पौधों का निःशुल्क वितरण भी किया जा चुका है। संस्था का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इस हरित अभियान को और व्यापक बनाना है।

ये लोग निभा रहे हैं महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

कल्पतरू की इस मुहिम को सफल बनाने में संस्था के अध्यक्ष अतुल मेहरोत्रा के साथ भूपेंद्र मेहरा, डीपी सिंह, दीपक बंसल, बीएस डंगवाल तथा आरसी पांडेय मुख्य रूप से अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।

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पर्यावरण संरक्षण की प्रेरक मिसाल

विश्व पर्यावरण दिवस पर कल्पतरू का संदेश स्पष्ट है कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक संरक्षित करना और समाज को प्रकृति से जोड़ना ही सच्चा पर्यावरण संरक्षण है। कल्पतरू वन का जंगल में बदलता स्वरूप इस बात का प्रमाण है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो छोटे प्रयास भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

“पौधे लगाइए, उन्हें पालिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली बचाइए” – यही है कल्पतरू का संदेश।

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