बोले शिवराज सिंह चौहानः मैं मंत्री नहीं, एक भक्त और शिष्य बनकर आया हूं

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उत्तराखंड दौरे पर पहुंचे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को हरिद्वार में आयोजित अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी समारोह में शिरकत की और समापन समारोह में संबोधन दिया। समारोह में उन्होंने कहा कि मैं यहां मंत्री नहीं, बल्कि एक शिष्य, भक्त और सेवक बनकर आया हूं। उन्होंने साझा किया कि बचपन में उन्होंने ‘अखण्ड ज्योति’ पत्रिका पढ़ी, जिसका हर शब्द उनके लिए एक मंत्र है।

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शिवराज सिंह चौहान ने अपने अनुभवों को याद करते हुए बताया कि नर्मदापुरम में गायत्री शक्तिपीठ के लोकार्पण के समय पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी उनके पास आए। भोपाल से वे गुरुदेव से दीक्षा लेने गए थे और गुरुदेव ने उन्हें माथे पर तिलक लगाया। इस स्पर्श ने उन्हें रोमांचित कर दिया और जीवन को नई दिशा दी।

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मंत्री ने कहा कि गायत्री परिवार संस्कृति की सरिता, संस्कारों का सिंधु और धर्म का अश्वमेध है। उन्होंने अखण्ड ज्योति को बुद्धि और विवेक से जोड़ने वाली ज्योति बताया। उन्होंने भारत की परंपरा पर भी जोर दिया, कहा कि हमारा देश कभी तलवार के जोर पर किसी पर कब्जा नहीं करता और अपने विचारों को किसी पर थोपी नहीं जाती। यह वही धरती है जिसने वसुधैव कुटुंबकम् का संदेश दिया और विश्व कल्याण की कामना की।

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इस मौके पर शिवराज सिंह चौहान ने जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि से भी भेंट की और समारोह के दौरान पौधरोपण किया। उन्होंने कहा कि यह क्षण आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के संगम के रूप में हमेशा स्मरणीय रहेगा।

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