प्रयोग-यात्रा-सरिता: उत्तराखंड विज्ञान यात्रा 2026
पद्मश्री प्रो. एच.सी. वर्मा की ‘उत्तराखंड विज्ञान प्रयोग यात्रा’ का भव्य आयोजन: शिक्षकों और छात्रों को सिखाए भौतिकी के रोचक गुर
उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों में विज्ञान को सरल, व्यावहारिक और प्रयोगात्मक बनाने के उद्देश्य से ‘उत्तराखंड में प्रयोग यात्रा: सरिता’ नामक अनूठे विज्ञान अभियान का भव्य आगाज हुआ है। 12 मई से 1 जून तक चलने वाले इस राज्यव्यापी अभियान का नेतृत्व देश के सुप्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी, आईआईटी कानपुर के पूर्व प्रोफेसर और पद्मश्री डॉ. एच.सी. वर्मा कर रहे हैं। ‘साइंस इन द सर्विस ऑफ सोसाइटी’ (SSS) संस्था के सहयोग से आयोजित इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों और विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना है।
भीमताल डायट में कार्यशाला: “बिना गणित के भौतिक विज्ञान आगे नहीं बढ़ सकता”
अभियान के तहत जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) भीमताल में विज्ञान शिक्षकों के लिए दो-दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ डायट प्रशिक्षुओं द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना एवं विज्ञान गीत से हुआ।
मुख्य अतिथि प्रो. एच.सी. वर्मा ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा:
“विज्ञान केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे बच्चों के दैनिक जीवन से जोड़ा जाना चाहिए। शिक्षकों को चाहिए कि वे विज्ञान को रोचक, व्यावहारिक और स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर सरल प्रयोगों के माध्यम से जनसामान्य तक पहुँचाएं।”
कार्यशाला के दूसरे दिन प्रो. वर्मा ने भौतिक विज्ञान और गणित के गहरे संबंधों को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि बिना गणित को समझे भौतिकी को गहराई से नहीं समझा जा सकता। उन्होंने अपनी हालिया लिखित पुस्तक ‘कैलकुलस द प्रिंसेस ऑफ मैथमेटिक्स’ पर भी विस्तृत चर्चा की और शिक्षकों व शोधार्थियों के जटिल सवालों के बेहद सहज और रोचक जवाब दिए। इस अवसर पर संस्थान में स्थापित किए जा रहे ‘विज्ञान गतिविधि केंद्र’ का उद्घाटन किया गया और प्रख्यात भौतिक विज्ञानी प्रो. डी.डी. पंत के पोस्टर का अनावरण भी हुआ।
भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय में जुटे हजारों छात्र
यात्रा के अगले पड़ाव में नैनीताल के प्रतिष्ठित ‘भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय’ में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहाँ प्रो. वर्मा ने एक हजार से अधिक छात्र-छात्राओं और विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षकों को संबोधित किया।
उन्होंने न्यूनतम लागत और कबाड़ से जुगाड़ (लो-कॉस्ट सामग्री) के माध्यम से भौतिक विज्ञान के मूल सिद्धांतों को समझाने के लिए कई छोटे-छोटे आकर्षक प्रयोग करके दिखाए। प्रो. वर्मा ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि तकनीक के माध्यम से हमें अपनी पृथ्वी को प्रदूषण मुक्त, स्वच्छ और सुंदर बनाना है।
इसी कार्यक्रम में एरीज (ARIES) के वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र सिंह बिष्ट ने भी जलवायु परिवर्तन और भविष्य के संभावित खतरों के प्रति आगाह करते हुए मौसम विज्ञान के अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रमुख सहयोगियों की उपस्थिति
इस पूरी प्रयोग यात्रा को सफल बनाने में कुमाऊं मंडल के संयोजक भवानी शंकर कांडपाल, डायट प्राचार्य सुरेश चंद्र आर्य, समन्वयक डॉ. शैलेंद्र सिंह धपोला, सैनिक स्कूल के प्रधानाचार्य बिशन सिंह मेहता, उप-प्रधानाचार्य प्रवीण सती, डॉ. प्रेम सिंह मावड़ी, गिरिजा शंकर जोशी, डॉ. विमल किशोर, डॉ. ज्योतिर्मय मिश्र, राजेश पांडे, अनुभव अवस्थी और विनोद कुमार जोशी सहित भारी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।
यह यात्रा उत्तराखंड के ग्रामीण और महानगरीय दोनों क्षेत्रों के बच्चों में विज्ञान के प्रति एक नई अलख जगाने में मील का पत्थर साबित हो रही है।




