फिर गरमाया फायरिंग मामलाः विधायक पुलिस हिरासत में, महापंचायत पर कड़ी नजर

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उत्तराखंड में पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन और खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार के बीच सियासी युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों नेताओं के बीच ताजा विवाद में एक और नया मोड़ सामने आया है, जब उमेश कुमार ने अपने कार्यालय में ब्राह्मण समाज की महापंचायत आयोजित करने का ऐलान किया। इसके बाद पुलिस-प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट हो गया, और डोईवाला पुलिस ने उमेश कुमार को हिरासत में ले लिया, साथ ही उनके कार्यालय जाने वाले सभी मार्गों पर पुलिस बल तैनात कर दिया।

उमेश कुमार का कहना है कि पुलिस द्वारा उन्हें हिरासत में लेना गलत था, क्योंकि उनका उद्देश्य सिर्फ शांति और सद्भाव बनाए रखना था। उन्होंने दावा किया कि सभा के लिए उन्होंने पहले ही मना कर दिया था, लेकिन फिर भी लोग इकट्ठा हो गए। उनका कहना था कि पुलिस ने उनकी योजना को विफल कर दिया और शांति बनाए रखने की उनकी कोशिशों को गलत तरीके से नज़रअंदाज़ किया। उमेश कुमार ने यह भी कहा कि पुलिस ने लक्सर में चप्पे-चप्पे पर तैनाती की थी, लेकिन उनका उद्देश्य अराजकता से बचना था। उन्होंने सभी से अपील की कि देवभूमि में शांति और सद्भाव बनाए रखा जाए।

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यह विवाद 25 जनवरी से शुरू हुआ था, जब उमेश कुमार ने पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन को सोशल मीडिया पर ललकारते हुए लंढौरा स्थित उनके महल का दौरा किया था। आरोप था कि उन्होंने पिस्टल लहराई, जिसके बाद 26 जनवरी को कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने उमेश कुमार के कार्यालय पर ताबड़तोड़ फायरिंग की। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिससे विवाद और गहरा हो गया। चैंपियन पर आरोप था कि उन्होंने और उनके समर्थकों ने उमेश कुमार के समर्थकों के साथ मारपीट भी की। इसके बाद उमेश कुमार भी पिस्टल लहराते हुए मौके पर पहुंचे।

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पुलिस ने इस मामले में दोनों नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया और कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन को न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि उमेश कुमार को जमानत मिल गई। चैंपियन के जेल जाने के बाद गुर्जर समाज ने महापंचायत बुलाई थी, लेकिन कुंवर प्रणव ने पत्र लिखकर उसे स्थगित करने की अपील की थी। इसके बावजूद गुर्जर समाज के लोग चैंपियन के महल के बाहर इकट्ठा हो गए और चैंपियन की रिहाई की मांग की, साथ ही उमेश कुमार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

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