कुमाऊँ में जल संरक्षण की बड़ी पहल, भूजल सर्वे और बजट जारी करने के निर्देश

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हल्द्वानी। कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत ने सोमवार को कुमाऊँ मण्डल में संचालित स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी (SARRA) योजना की समीक्षा बैठक की। बैठक में परियोजना निदेशक डा. एस. के. उपाध्याय ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से योजना के उद्देश्य, क्रियान्वयन ढांचे और जनपदवार प्रगति की जानकारी दी।

प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि SARRA योजना का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड के जल स्रोतों और नदियों के प्रवाह को बढ़ाना, उनका पुनर्जीवन करना और सततता सुनिश्चित करना है। इसके तहत संवेदनशील जल स्रोतों की पहचान, वर्षा आधारित नदियों और धाराओं का उपचार तथा स्थानीय समुदाय की सहभागिता से जल संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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एक जनपद–एक नदी अवधारणा के अंतर्गत कुमाऊँ मण्डल में चयनित नदियों की स्थिति भी साझा की गई। इसमें अल्मोड़ा में जटा गंगा, बागेश्वर में गरुड़ गंगा, चम्पावत में गौड़ी नदी, नैनीताल में शिप्रा नदी, पिथौरागढ़ में पूर्वी रामगंगा और ऊधमसिंह नगर में फीका नदी को चिन्हित किए जाने की जानकारी दी गई। कुछ जनपदों में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) निर्माणाधीन है, जबकि कुछ योजनाओं को राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति (SLEC) से स्वीकृति मिलने के बाद बजट जारी किया गया है।

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बैठक में कुमाऊँ आयुक्त ने निर्देश दिए कि केन्द्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) और केन्द्रीय जल आयोग (CWC) के माध्यम से रामगढ़, मुलेबर, शीतला, पंगोट, हल्द्वानी और ऊधमसिंह नगर के विभिन्न ब्लॉकों में भूजल की वर्तमान स्थिति का सर्वे कराया जाए, ताकि भविष्य की योजनाओं के लिए वैज्ञानिक आंकड़े उपलब्ध हो सकें।

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उन्होंने SLEC से स्वीकृत योजनाओं के लिए आवश्यक बजट शीघ्र जारी करने, कार्यों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने और SARRA योजना के तहत जल स्रोतों व नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन के कार्यों को प्रभावी रूप से धरातल पर उतारने पर जोर दिया।

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