बड़ी खबर-यहां फर्जी प्रमाणपत्रों से बना सरकारी अध्यापक, अब मिली इतने साल की सजा

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राज्य में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी पाने वाले एक सेवानिवृत्त सरकारी अध्यापक को अदालत ने सात साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अध्यापक पर बीस हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। आरोपी 2016 में रिटायर हो चुका है।


जानकारी के अनुसार थत्यूड़ थाने में 15 अगस्त 2018 को यशवीर सिंह नाम के एक व्यक्ति ने एक शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत में आरोप लगाया गया कि उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के निवासी हरिओम सिंह ने झूठे प्रमाण पत्रों के आधार पर अध्यापक की नौकरी हासिल की है।

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इस मामले की जांच शुरु हुई। जांच में सामने आया कि हरिओम सिंह ने नियुक्ति के समय जो प्रमाण पत्र जमा किए हैं उनमें कई खामियां हैं। अलग अलग जगहों पर जमा किए गए प्रमाण पत्र भी अलग अलग हैं। इससे हरिओम सिंह पर शक गहराया। इसके साथ ही कई अनिवार्य दस्तावेज लगाए भी नहीं गए हैं। इसके बावजूद हरिओम सिंह को नियुक्ति दे गई।

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जांच में पता चला कि खुशीराम ने झूठे प्रमाण पत्रों के आधार पर अध्यापक की नौकरी हासिल की। हरिओम सिंह को प्राथमिक विद्यालय सेंदूल जौनपूर टिहरी गढ़वाल में पहली नियुक्त पाई। जबकि 31 मार्च 2016 को राजकीय प्राथमिक विद्यालय डांगू जौनपूर टिहरी गढ़वाल से हरिओम सिंह सेवानिवृत भी हो गए। मामले में शिक्षा विभाग ने शिकायत पर आरोपी अध्यापक के प्रमाण पत्रों की जांच भी करवाई। इनमें भी खामियां पाईं गईं।

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इसके बाद मामला अदालत में पहुंचा। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अविनाश कुमार की अदालत में तमाम सबूत रखे। सबूतों के आधार पर कोर्ट ने हरिओम सिंह को सात साल की कठोर सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही उसपर 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है।

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