पहाड़ की बेटी ने पेश की आत्मनिर्भरता की मिसाल: ‘देवभूमि उद्यमिता योजना’ से पिथौरागढ़ की मानसी बनीं सफल बिजनेस वुमन; पारंपरिक ‘ऐपन कला’ को बनाया रोजगार

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पिथौरागढ़ के लक्ष्मण सिंह महार राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बीबीए की छात्रा मानसी कापड़ी ने अपने बुलंद हौसलों से उत्तराखंड में युवा उद्यमिता की एक नई मिसाल पेश की है। बचपन से ही पारंपरिक ऐपन कला में रुचि रखने वाली मानसी ने अपने इस शौक को केवल एक हुनर तक सीमित न रखकर, उसे एक सफल उद्यम में बदलने का साहसिक निर्णय लिया। उनकी इस प्रतिभा को धरातल पर उतारने का काम उत्तराखंड सरकार की ‘देवभूमि उद्यमिता योजना’ ने किया, जिसके बूटकैंप और प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से उन्हें कला को व्यावसायिक रूप देने के गुर सीखने का अवसर मिला।

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मानसी की इस उद्यमिता यात्रा को तब बड़ी सफलता मिली जब उच्च शिक्षा विभाग और भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआईआई), अहमदाबाद के सहयोग से उन्हें ब्रांडिंग, पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग और व्यवसाय संचालन का गहन प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। अपनी मेंटर डॉ. रुचिता पंघुरिया के मार्गदर्शन में उन्होंने अपने स्टार्टअप “Homies Vibes” की शुरुआत की। फरवरी २०२५ में आयोजित देवभूमि उद्यमिता स्टार्टअप मेगा इवेंट में उनके अभिनव बिजनेस मॉडल को ₹७५,००० का सीड फंड (वित्तीय सहायता) प्राप्त हुआ। आज मानसी अपने इस स्टार्टअप के जरिए सालाना लगभग ₹८०,००० मूल्य के ऐपन उत्पादों की बिक्री कर रही हैं और तेजी से अपने ग्राहकों का दायरा बढ़ा रही हैं।

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मानसी की इस सफलता के पीछे ‘देवभूमि उद्यमिता योजना’ की एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका है, जिसे उत्तराखंड के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा सितंबर २०२३ में शुरू किया गया था। पांच वर्षीय इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों को नवाचार के केंद्र के रूप में विकसित करना है, ताकि युवाओं को रोजगार ढूंढने वाले के बजाय रोजगार पैदा करने वाला (रोजगार सृजक) बनाया जा सके। यह योजना कृषि, हस्तशिल्प, पर्यटन और ड्रोन तकनीक जैसे १२ प्रमुख क्षेत्रों में काम कर रही है और छात्रों को ओरिएंटेशन, विशेषज्ञ मार्गदर्शन तथा सीड फंडिंग जैसी आवश्यक सुविधाएं प्रदान कर रही है।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मानसी कापड़ी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने रेखांकित किया कि देवभूमि उद्यमिता योजना के माध्यम से विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है, बल्कि पहाड़ के युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, जो राज्य में पलायन की गंभीर समस्या को रोकने में भी बेहद मददगार साबित हो रहा है।

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