बुधवार को ‘विश्व बाघ दिवस’ के अवसर पर देहरादून के जाखन स्थित एक होटल में “एकल उपयोग प्लास्टिक प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन एवं प्रवर्तन“ विषय पर राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बाघ संरक्षण पर आधारित विशेष चित्र एवं पोस्टकार्ड का विमोचन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मानव-वन्यजीव संघर्ष में साहसिक योगदान देने वाले नागरिकों और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित भी किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘इकोलॉजी और इकोनॉमी’ के बेहतर संतुलन से ही सतत विकास का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगल-यूज़ प्लास्टिक को पूरी तरह प्रतिबंधित करने का संकल्प केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए व्यापक जन-जागरूकता और जनभागीदारी की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि जंगलों में छोड़ा गया प्लास्टिक वन्यजीवों और विशेषकर बाघों के स्वास्थ्य व जीवन के लिए गंभीर खतरा बन रहा है। राज्य सरकार चारधाम यात्रा मार्गों और प्रमुख पर्यटक स्थलों को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए विशेष प्रवर्तन अभियान चला रही है। इसके साथ ही, प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने उद्योग जगत से इको-फ्रेंडली पैकेजिंग अपनाने तथा युवाओं और स्वयं सहायता समूहों से कपड़े व जूट के थैलों के प्रयोग को बढ़ावा देकर इसे जन-आंदोलन बनाने की अपील की। उन्होंने विश्वास जताया कि कार्यशाला से प्राप्त सुझाव राज्य को सिंगल-यूज़ प्लास्टिक मुक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस अवसर पर देहरादून के मेयर सौरभ थपलियाल, टिहरी की जिला पंचायत अध्यक्ष इशिता सजवाण, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक कपिल लाल, प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) नीना ग्रेवाल और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते सहित कई वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।




