हल्द्वानी वनभूलपुरा घटना की न्यायिक जांच की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने भेजा ज्ञापन

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चन्द्रशेखर जोशी

रामनगर
हल्द्वानी घटना की हो न्यायिक जांच।विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को भेजा ज्ञापन।

हल्द्वानी वनफूलपुरा कांड की न्यायिक जांच की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों ने उप जिलाधिकारी राहुल शाह के माध्यम से मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट को ज्ञापन भेजा।
विभिन्न सामाजिक राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों द्वारा उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भेजे ज्ञापन में बताया है कि कुमाऊं के प्रवेश द्वार  हल्द्वानी के बनभूलपुरा में 8 फ़रवरी की शाम प्रशासन द्वारा एक समुदाय विशेष के धार्मिक स्थल एवं शैक्षणिक स्थल को ढहाये जाने को लेकर हुई हिंसा,आगजनी और फायरिंग की घटना के बाद पूरे क्षेत्र सहित प्रदेश एवं देश के लोग दहशत में है।

खुफिया विभाग द्वारा शासन प्रशासन को समय-समय पर भेजी गई रिपोर्ट को स्थानीय प्रशासन ने नजर अंदाज कर बिना तैयारी के जल्दबाजी में की गई कार्रवाई से घटना को विकराल बना दिया।हल्द्वानी की इस घटना ने  शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली एवं नीयत पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पुलिस फायरिंग में कई लोगों की मौत हो चुकी है जबकि फायरिंग और पथराव में बड़ी संख्या में आम नागरिक, पुलिस , प्रशासन के लोगों के अलावा मीडिया कर्मी घायल भी हुये हैं,तथा सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट किया गया है इस घटना के बाद तनाव का माहौल है।

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उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भेजें चार सूत्रीय ज्ञापन में मांग की गई है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय 8 फ़रवरी को उत्तराखंड के हल्द्वानी के बनभूलपुरा की घटना को स्वत: संज्ञान में लेकर सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में वर्तमान में कार्यरत न्यायाधीश के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन कर पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कराये और गुनहगारों को सजा दें।जांच निष्पक्ष हो सके इसके लिये नैनीताल जिले के जिलाधिकारी एवं एस एस पी एवं घटना में उपस्थित सभी पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारियों का अविलंब स्थानांतरण किया जाये।

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शासन-प्रशासन द्वारा बनभूलपुरा के आम नागरिकों पर कठोर धाराओं में मुक़दमें दर्ज करने, मनमानी गिरफ्तारी और दमन पर रोक लगाई जाये।8 फ़रवरी की घटना में मारे गये एवं गंभीर रुप से घायल हुये लोगों को उचित मुआवजा दिया जाये एवं प्रभावित क्षेत्र के नागरिकों से मीडिया कर्मियों के मिलने पर जारी रोक को हटाया जाये। उत्तराखंड में बड़ी आबादी पीढ़ियों से नजूल भूमि, वन भूमि पर बसी हुई है।अतिक्रमण के नाम पर उन्हें उजाड़ने के बजाय जो जहां रहता है वहीं पर उसे मालिकाना हक प्रदान किया जाये।

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ज्ञापन भेजने वालों में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के प्रभात ध्यानी, इंकलाबी मजदूर केंद्र के रोहित रूहेला, वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति के पीसी जोशी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित संगठन के भारत नंदन भट्ट, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की तुलसी छिम्बाल, किसान संघर्ष समिति के संयोजक ललित उप्रेती,पछास के रवि ,चिंताराम, मोहम्मद आसिफ आदि थे।