‘संविधान हत्या दिवस’: 1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय; सीएम धामी ने लोकतंत्र सेनानियों को किया सम्मानित

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गुरुवार को देहरादून के जी.एम.एस. रोड स्थित एक निजी होटल में ‘संविधान हत्या दिवस’ के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वर्ष १९७५ के आपातकाल के क्रूर दौर में लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ने वाले महान लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिजनों को अंगवस्त्र व स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने इतिहास के उस दौर को याद किया और कहा कि २५ जून १९७५ को देश पर थोपा गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय था, जब तत्कालीन सरकार द्वारा महज अपनी सत्ता बचाने के लिए नागरिकों की स्वतंत्रता का हनन किया गया, प्रेस की आजादी पर पूरी तरह अंकुश लगाया गया और हमारे पावन संविधान की मूल भावना को गहरी चोट पहुंचाई गई।

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मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि आज हम जिस स्वतंत्र माहौल में सांस ले रहे हैं, वह इन्हीं राष्ट्रभक्तों के अदम्य साहस, त्याग और लंबे संघर्ष की देन है, जिसके कारण देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की पुनः स्थापना संभव हो सकी। उन्होंने कहा कि उनका यह ऐतिहासिक योगदान वर्तमान और आने वाली भावी पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बना रहेगा। भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकार देता है, जिन्हें आपातकाल में कुचलने की कोशिश हुई, लेकिन देश की जागरूक जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से इसका करारा जवाब देते हुए लोकतंत्र की पुनर्स्थापना की। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार अंत्योदय, राष्ट्र प्रथम तथा ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूलमंत्र पर चलते हुए समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचा रही है।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी सरकार द्वारा लोकतंत्र सेनानियों के कल्याण और मान-सम्मान के लिए किए जा रहे कार्यों का विवरण साझा करते हुए बताया कि राज्य सरकार अपने लोकतंत्र सेनानियों के प्रति सदैव आदर भाव रखती है। इसी कड़ी में साल २०२३ में राज्य सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों की मासिक सम्मान निधि को १६ हजार रुपये से बढ़ाकर २० हजार रुपये प्रति माह कर दिया है। इसके साथ ही, आपातकाल के दौरान जेल की यातनाएं सहने वाले सेनानियों और उनके आश्रित जीवनसाथियों के लिए विशेष पहचान-पत्र भी जारी किए गए हैं, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि इन महानायकों के संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने उपस्थित जनता से आह्वान किया कि ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को सर्वोपरि रखते हुए ‘विकसित भारत’ और ‘श्रेष्ठ उत्तराखंड’ के निर्माण में सभी नागरिक एकजुट होकर अपना बहुमूल्य योगदान दें। इस गरिमामयी कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक खजान दास, सविता कपूर, उमेश शर्मा ‘काऊ’ और महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में लोकतंत्र सेनानी व उनके परिवारजन उपस्थित रहे।

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