उत्तराखंड: आध्यात्मिक राजधानी की ओर मजबूत कदम; चारधाम के साथ मानसखंड के पौराणिक मंदिरों में उमड़ा श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड जनसैलाब

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उत्तराखंड विश्व की ‘आध्यात्मिक राजधानी’ बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2026 की पहली छमाही (जनवरी से जून) की रिपोर्ट के अनुसार, चारधाम यात्रा के साथ-साथ प्रदेश के अन्य प्रमुख पौराणिक मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। जागेश्वर धाम (अल्मोड़ा) और त्रियुगीनारायण (रुद्रप्रयाग) में दर्शनार्थियों की संख्या ढाई गुना बढ़ी है, जबकि धारी देवी मंदिर में यह आंकड़ा दोगुना और पूर्णागिरि धाम में डेढ़ गुना हो गया है। नैनीताल स्थित कैंची धाम में भी आस्था का सैलाब उमड़ा है, जहाँ पहली छमाही में रिकॉर्ड 24.34 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन किए।

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चारधाम यात्रा और मानसखंड क्षेत्र के तीर्थस्थलों में बुनियादी सुविधाओं के विकास, सुगम सड़कों और बेहतर परिवहन सेवाओं के चलते यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। यमुनोत्री धाम में इस यात्राकाल में रिकॉर्ड 6.54 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं, जो धाम के इतिहास में अब तक की सर्वाधिक संख्या है। वहीं, बद्रीनाथ धाम में भी शुरुआती 100 दिनों में 15.52 लाख से अधिक यात्री पहुंचे हैं। इसके अतिरिक्त, पिथौरागढ़ स्थित श्री आदि कैलाश धाम में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के बाद से श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार भारी उछाल देखा जा रहा है, जहाँ इस वर्ष केवल मई और जून के दो महीनों में ही 52 हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप राज्य सरकार उत्तराखंड को दुनिया की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। ‘मानसखण्ड मंदिरमाला मिशन’ के तहत कुमाऊं के पौराणिक मंदिरों का कायाकल्प किया जा रहा है और सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों पर विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है। सरकार के इन दूरदर्शी प्रयासों का ही परिणाम है कि राज्य के पौराणिक मंदिरों और सांस्कृतिक धरोहरों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिल रही है।

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