राजाराम विद्यार्थी को मिला तीसरा मथुरादत्त मठपाल स्मृति सम्मान…. दूदबोलि के वार्षिकांक का भी हुआ विमोचन….

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रामनगर-कुमाउनी के वरिष्ठ साहित्यकार,साहित्य अकादमी पुरुस्कार से सम्मानित मथुरादत्त मठपाल की स्मृति में दिया जाने वाला सम्मान इस बार लेखक राजाराम विद्यार्थी को दिया गया।सम्मान के रूप में विद्यार्थी को शाल उढ़ाकर, सम्मान स्मृति चिन्ह भेंट कर ,पांच हजार रुपए नगद धनराशि प्रदान की गई।एक स्थानीय रेस्टोरेंट में हुए कार्यक्रम की शुरुआत मथुरादत्त मठपाल के चित्र पर माल्यार्पण से हुई।

उसके बाद प्रो गिरीश पंत ने सभी का स्वागत करते हुए मथुरादत्त मठपाल के साहित्य पर बातचीत रखी।शिक्षक,कवि धर्मेंद्र नेगी ने मठपाल की कविता आङ-आङ चिलैल हैगो’ और विजय जमनाल ने एक ठीठ कपोई डानक का सस्वर वाचन किया।इस दौरान अमित लोहनी के बांसुरी वादन से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।तत्पश्चात नवेंदु मठपाल द्वारा राजाराम विद्यार्थी के जीवन और साहित्य कर्म पर बात रखी गई।फिर सामूहिक रूप से राजाराम विद्यार्थी को सम्मानित किया गया । कुमाउनी पत्रिका दुदबोली के वार्षिकांक का विमोचन किया गया।

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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वक्ता
साहित्य अकादमी दिल्ली के पूर्व सचिव वरिष्ठ साहित्यकार हरिसुमन बिष्ट ने अपनी बात रखते हुए कहा
कुमाउनी भाषा और साहित्य को आगे बढाने में मथुरादत्त मठपाल जी का योगदान अविस्मरणीय रहा है। उन्होंने उत्तराखंड की लोकभाषाओं को ही नहीं नेपाली तक के संवर्धन के लिए  जिस तरह का मंच तैयार किया वह आज हमारी भाषाओं के प्रति लोगों का अनुराग बढ़ाने में प्रेरक रहा है।

मठपाल जी ने ‘दुदबोलि’ पत्रिका के माध्यम से न केवल हमारी भाषा और साहित्य को आगे बढाया, बल्कि यहां के साहित्यकारों की रचनाओं का हिंदी में अनुवाद कर उन्हें व्यापक फलक भी दिया। चंद्रकुंवर बर्तवाल जैसे कवियों की कविताओं का कुमाउनी में अनुवाद कर उन्होंने कुमाउनी साहित्य को भी समृद्ध किया। उनकी जयंती पर हम केवल उन्हें याद नहीं करते हैं, बल्कि ‘दुदबोलि’ की पूरी उस परंपरा को भी याद करते हैं, जिसमें पुराने साहित्य को संरक्षित करने, मौजूदा लेखन को आगे बढाने और भविष्य में दुलबोलियो को समृद्ध करने की दूरदर्शिता हो। इस लिहाज से मथुरादत्त मठपाल एक तरह से व्यक्ति नहीं संस्थान हैं, जो हमेशा दुदबोलियों के लिए प्रेरणा रहेंगे।

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राजाराम विद्यार्थी ने कहा श्री मठपाल ने हमेशा उनको कुमाउनी में लिखने को प्रेरित किया।भविष्य में वे  अपनी दूदबोलि के विकास के लिए विशेष प्रयास करेंगे।दिल्ली से आए कुमाउनी दूदबोलि संपादक चारु तिवारी,
रंगकर्मी उमेश चंद्र बंदूनी, साहित्यकार चंद्रसिंह रावत ने हमरि दुदबोलि, हमरि पछयाण  पर अपनी बातचीत को केंद्रित किया।चारू तिवारी ने पत्रिका दुदबोली की भविष्य की योजनाओं पर भी बातचीत रखी।

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कुमाउनी साहित्यकार भुवन पपने ने सभी का आभार व्यक्त किया। छोई की ग्राम प्रधान भगवती जोशी ने अध्यक्षता की,संचालन निखिलेश उपाध्याय ने किया।इस मौके पर नंदिनी मठपाल,नवीन तिवारी ललित बिष्ट,विक्रम शर्मा,पुष्पा मठपाल,सगीर अशरफ,कल्पना मठपाल,यशोधर मठपाल, डा पंकज उप्रेतीसुरेश लाल,हरि मोहन शर्मा,राजेश भट्ट,
सुभाष गोला,दिनेश रावत,रमेश बिष्ट,हेमंत कुमार,
चंद्र शेखर कारगेती,दयाल पांडे मौजूद रहे।