उत्तराखंड के रामनगर स्थित तराई पश्चिमी वन प्रभाग ने अवैध खनन पर नकेल कसते हुए राजस्व संग्रहण में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वन विभाग द्वारा अपनाई गई बहुस्तरीय निगरानी और सख्त प्रवर्तन कार्रवाई के चलते पिछले सत्र की तुलना में राजस्व प्राप्ति में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
प्रभावी निगरानी से बढ़ा राजस्व
तराई पश्चिमी वन प्रभाग के अंतर्गत कोसी नदी के 05 और दाबका नदी के 01 खनन निकासी गेट पर अक्टूबर 2025 से 19 जून 2026 तक उपखनिज निकासी का कार्य संपन्न हुआ। इस अवधि के दौरान वन विभाग ने खनन गतिविधियों की निरंतर और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
विभाग द्वारा अपनाई गई प्रमुख रणनीतियाँ इस प्रकार रहीं:
सघन निगरानी: नियमित गश्त, आकस्मिक निरीक्षण और रात्रिकालीन चेकिंग को प्राथमिकता दी गई।
अभिलेखों का सत्यापन: निकासी गेटों पर वैध प्रपत्रों और तय सीमा की जांच सुनिश्चित की गई।
सख्त कानूनी कार्रवाई: अवैध खनन और निर्धारित क्षेत्र से बाहर खनन करने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर वाहनों को सीज किया गया और दोषियों पर वैधानिक कार्रवाई की गई।
राजस्व के आंकड़ों में उछाल (तुलनात्मक विवरण)
वन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में इस बार राजस्व संग्रहण में दोगुने से भी अधिक की वृद्धि हुई है




