मसूरी गोलीकांड के अमर शहीदों का बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दी श्रद्धांजलि; बोले—’राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष और तप से साकार हुआ उत्तराखंड का सपना’

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मसूरी स्थित शहीद स्थल झूलाघर में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए मसूरी गोलीकांड के अमर शहीदों को नमन किया। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष, तप, त्याग और सर्वोच्च बलिदान से ही पृथक उत्तराखंड का सपना साकार हुआ है। मसूरी की धरती 1994 के ऐतिहासिक जनसंघर्ष की साक्षी रही है, जहां आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए आंदोलनकारियों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन बलिदानों को कभी भुलाया नहीं जा सकता और नई पीढ़ी को राज्य निर्माण के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराना हम सभी का दायित्व है।

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राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकारी सेवाओं में आंदोलनकारियों को दिए जा रहे 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का दायरा बढ़ाकर अब इसमें परित्यक्ता, विधवा और तलाकशुदा पुत्रियों को भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही शहीद आंदोलनकारियों के आश्रितों की मासिक पेंशन ₹3,000 से बढ़ाकर ₹5,500, घायल व जेल गए आंदोलनकारियों की ₹6,000 से बढ़ाकर ₹7,000, सक्रिय आंदोलनकारियों की ₹4,500 से बढ़ाकर ₹5,500 तथा पूर्णतः शय्याग्रस्त दिव्यांग आंदोलनकारियों की पेंशन ₹20,000 से बढ़ाकर ₹30,000 प्रतिमाह की गई है। आंदोलनकारियों के अधिकतम दो बच्चों को स्कूल-कॉलेज में निःशुल्क शिक्षा और रोडवेज बसों में आजीवन निःशुल्क यात्रा की सुविधा भी दी जा रही है।

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मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि राज्य सरकार ने मातृशक्ति के सम्मान में नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, देश में सर्वप्रथम समान नागरिक संहिता (UCC), देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून और कड़ा भूकानून लागू किया है, जिसके तहत 34 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी ढंग से सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं। साथ ही प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान व डेमोग्राफी की रक्षा के लिए सख्त धर्मांतरण और दंगा विरोधी कानून बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों तक सड़क, रेल, रोपवे और हवाई संपर्क का तेजी से विस्तार कर सरकार का लक्ष्य रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा देना और अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना है।

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