उत्तराखण्ड में ‘वन नेशन-वन एजुकेशन’ की ऐतिहासिक शुरुआत: मदरसा बोर्ड समाप्त; सीएम धामी ने किया ‘अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ का शुभारंभ

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बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ का विधिवत शुभारंभ किया। ‘वन नेशन-वन एजुकेशन’ (एक देश-एक शिक्षा) की परिकल्पना को धरातल पर उतारते हुए राज्य सरकार ने इस ऐतिहासिक निर्णय के तहत पूर्व से चले आ रहे मदरसा बोर्ड को पूरी तरह समाप्त कर दिया है और १ जुलाई २०२६ से इस नए शिक्षा मॉडल को लागू किया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को नए प्रारूप के मान्यता प्रमाण पत्र वितरित किए और छात्र-छात्राओं को एन.सी.ई.आर.टी. की पुस्तकें भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य ध्यान राजनीति पर नहीं, बल्कि बच्चों के सुरक्षित और समृद्ध भविष्य पर है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के सभी छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों (मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी) के बच्चों को बिना किसी भेदभाव के समान शैक्षणिक और आधुनिक अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि इस प्राधिकरण की स्थापना किसी समुदाय की पहचान या धार्मिक परंपराओं को प्रभावित करने के लिए नहीं की गई है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखते हुए विज्ञान, गणित, कंप्यूटर और कौशल विकास में दक्ष बनाना है, ताकि वे एआई और डिजिटल तकनीक के आधुनिक युग में पीछे न छूटें।

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मुख्यमंत्री धामी ने शिक्षा को रोजगार के साथ-साथ समाज के सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण का सबसे प्रभावी साधन बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति-२०२० के अनुरूप यह नया समावेशी मॉडल केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह अल्पसंख्यक संस्थानों में डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट कक्षाओं, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देगा। इस पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से पहले की प्रणालियों में जिन वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया था, उन्हें भी अब बराबरी का अवसर प्राप्त होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्राधिकरण केवल मान्यता देने वाली संस्था नहीं होगा, बल्कि शिक्षकों के उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने का एक मजबूत माध्यम बनेगा।

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मुख्यमंत्री ने अंत में भारत की विविधता में एकता की ताकत को रेखांकित करते हुए समाज के सभी धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों और प्रबुद्ध नागरिकों से इस युगांतकारी पहल को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग देने की अपील की। उन्होंने कहा कि मान्यता प्राप्त करने वाले संस्थानों की यह बड़ी जिम्मेदारी है कि वे ज्ञानवान, संस्कारित और राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिक तैयार करें। इस ऐतिहासिक अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक प्रदीप बत्रा, विधायक उमेश शर्मा काउ, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह सहित विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के धर्मगुरु और शिक्षाविद उपस्थित रहे।

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