शुक्रवार को सचिवालय में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की भारत में डिप्टी रेजिडेंट रिप्रेजेंटेटिव सुश्री इजाबेल के बीच एक महत्वपूर्ण शिष्टाचार भेंट हुई। इस बैठक के दौरान उत्तराखंड सरकार और यूएनडीपी के सहयोग से राज्य में चल रहे विभिन्न विकास कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की गई और भविष्य के नए साझा क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने यूएनडीपी की टीम का स्वागत करते हुए आजीविका संवर्धन, डिजिटल गवर्नेंस और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में वैश्विक संस्था की तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ उठाने की बात कही।
उत्तराखंड के बेहतर साक्षरता दर का उल्लेख करते हुए मुख्य सचिव ने राज्य में युवाओं के कौशल विकास और रोजगार सृजन पर विशेष फोकस करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने यूएनडीपी से आग्रह किया कि वे राज्य के युवाओं को आधुनिक कौशल प्रदान करने के साथ-साथ उनके लिए टिकाऊ आजीविका के नए साधन विकसित करने में सहयोग करें। इसके अलावा, उत्तराखंड की ७० प्रतिशत वन भूमि और उसकी पर्यावरणीय महत्ता को देखते हुए मुख्य सचिव ने राज्य को कार्बन क्रेडिट प्रणाली का प्रभावी लाभ दिलाने तथा सुशासन को मजबूत करने के लिए बच्चे के जन्म से ही शुरू होने वाले डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम को लागू करने में यूएनडीपी से तकनीकी सहायता मांगी।

बैठक के दौरान यूएनडीपी की प्रतिनिधि सुश्री इजाबेल ने उत्तराखंड के विजन की सराहना करते हुए बताया कि संस्था राज्य में ‘सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एंड गुड गवर्नेंस’ (CPPGG) के साथ मिलकर सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के एकीकरण, स्थानीयकरण, निगरानी और क्षमता निर्माण की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने जानकारी दी कि दोनों पक्षों के बीच हुए व्यापक समझौते (MoU) के तहत जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और सर्कुलर इकोनॉमी आधारित कौशल विकास के क्षेत्रों में यूएनडीपी अपनी तकनीकी सहायता जारी रखेगी। इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम सहित केंद्र और राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।




