रामनगर (नैनीताल): कार्बेट टाइगर रिजर्व में लगभग 80 वर्ष की उम्र पूरी कर चुकी मादा हथिनी ‘सोनाकली’ का 17 अक्टूबर, 2026 की रात 10:45 बजे निधन हो गया। वह लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से पीड़ित थी। 18 अक्टूबर को वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सलामी देकर पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया।
सोनाकली को 23 जनवरी, 2018 को विधिवत सेवानिवृत्त कर दिया गया था। इसके बाद उससे कोई राजकीय कार्य नहीं लिया जाता था और केवल उसके स्वास्थ्य व देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जाता था।
सोनाकली का अविस्मरणीय योगदान:
सोनाकली को वर्ष 1997 में कार्बेट टाइगर रिजर्व लाया गया था। उसने ढिकाला, हल्दूपड़ाव और कालागढ़ क्षेत्र में लंबे समय तक सेवाएं दीं। अपने कार्यकाल के दौरान सोनाकली ने वन्यजीव संरक्षण और बाघ रेस्क्यू अभियानों में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:
वर्ष 2011: गर्जिया क्षेत्र में आदमखोर बाघ के रेस्क्यू अभियान में खास योगदान दिया।
वर्ष 2012: सर्पदुली रेंज में बाघ के हमले में दीवानी राम की मृत्यु के बाद सोनाकली ने भारी साहस दिखाते हुए शव को बाघ के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाला था।
वर्ष 2023: सर्पदुली क्षेत्र में एक अन्य बाघ रेस्क्यू अभियान में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
इसके अलावा उसने जंगलों में गश्त के दौरान कई बार महावतों और चारा काटने वाले मजदूरों की जान बचाई।
पार्क प्रशासन के अनुसार शांत और सरल स्वभाव की सोनाकली का जाना कार्बेट टाइगर रिजर्व के लिए एक अपूरणीय क्षति है। अंतिम संस्कार के दौरान उप निदेशक सुश्री पंडित शिरीन संजय (IFS), पार्क वार्डन श्री बिन्दरपाल, वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा सहित कई अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।




